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बेटियों ने भरी कामयाबी की नई उड़ान

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बेटियों ने भरी कामयाबी की उड़ान
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मुजफ्फरनगर। बेटियों ने कामयाबी की उड़ान भरी है। अपनी लगन, परिश्रम और साहस से विविध क्षेत्रों में वे सब कुछ भूल कर उपलब्धि की नई दास्तां लिख रही है। राह में आई मुश्किलें भी उन्हें डिगा नहीं सकी। नवरात्र में जिले की बेटियों के नायाब प्रदर्शन पर सभी को नाज है। भारत केसरी बनी पुरबालियान की पहलवान दिव्या काकरान और खतौली की वर्णिका सिंह की पेंटिंग ने देश-दुनिया में खूब धूम मचाई है।
दिव्या काकरान का अगला लक्ष्य गोल्ड कोस्ट, आस्ट्रेलिया में चार अप्रैल से आयोजित राष्ट्र मंडल खेलों में भारत को पदक दिलाना है। भारत की महिला कुश्ती टीम में वह यूपी की अकेली मल्ल है, जबकि बाकी पांच पहलवान हरियाणा की है। लखनऊ के साईं सेंटर में सभी महिला मल्ल का कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए प्रशिक्षण चल रहा है। दिव्या (68 किग्रा भार वर्ग) के साथ वीनेश फोगाट (50), बबीता फोगाट (53), पूजा ढांढा (57), ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक (62) तथा किरण(76) से देश को पदकों की उम्मीदें है। दिव्या सेन ने बताया कि भारत केसरी जीतने के बाद वह रविवार से लखनऊ कैंप में तैयारी में जुटेगी।
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वर्णिका ने इंजीनियरिंग छोड़ तूलिका के संग जोड़ी जिंदगी
मुजफ्फरनगर। वो लक्ष्य को पूरा करने में माहिर है और उसे अपनी क्षमताओं पर भी भरोसा है। बीटेक की डिग्री पाने के बाद तूलिका से रंगों के नए आयाम उकेर रही वर्णिका सिंह की पेंटिंग देश-दुनिया में पहचान बना रही है।
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खतौली के लाडपुर गांव की बेटी वर्णिका सिंह ने कला के विशिष्ट वर्णों और रंगों के संयोजन में अपनी प्रतिभा से नई उम्मीदें जगाई है। इंजीनियर बनने के बावजूद उसने कभी यह नहीं सोचा था कि पेंटिंग से ही जिंदगी का मोह हो जाएगा। अमेटी कॉलेज नोएडा से आईसीई में बीटेक के बाद वर्णिका आर्ट बीट ऑफ इंडिया में इंजीनियर बनी। यह कंपनी चित्रकला के क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट बनाती है। धीरे-धीरे वर्णिका के मन में बसी रंगों की चाहत ने उसे तूलिका का साथी बना दिया। बीते चार साल में उसकी पेंटिंग की गैलरी दिल्ली और देश के दूसरे बड़े शहरों में लग रही है। फिलहाल दिल्ली के कनॉट प्लेस में दि ललित में देश के उभरते चित्रकारों के साथ वर्णिका सिंह की पेंटिंग सजी है। 30 अप्रैल तक यह आर्ट गैलरी चलेगी। इससे पूर्व दि लोधी होटल में वर्णिका की पेंटिंग की प्रदर्शनी लग चुकी है। उसकी पहली पेंटिंग अमेरिका के टेक्सास में खरीदी गई, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वर्णिका बताती है कि बचपन से ही मन में रंगों को लेकर उत्सुकता थी, मगर साईंस की स्टूडेंट होने की वजह से कभी मुकम्मल वक्त नहीं मिला। पिता अखिल सिंह एवं मां अनिता सिंह ने बताया कि बेटी का हमेशा हौसला बढ़ाया। उसने इंजीनियर की नौकरी छोड़ पेंटिंग में करियर बनाने की इच्छा जताई थी। वर्णिका ने खतौली के गोल्डन हार्ट एकेडमी से हाईस्कूल और शहर के होली एंजिल्स कॉन्वेट स्कूल से इंटरमीडिएट किया। वर्णिका ने बताया कि वह मूर्ति कला के साथ एक्रेलिक पेंटिंग में सुनहरा भविष्य बनाना चाहती है। उसकी पेंटिंग में आधुनिकता के साथ ग्रामीण जीवन की भावना और प्राकृतिक सौंदर्य भी छिपा है।
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