सुनीति पर चलकर उत्तम वस्तु की प्राप्ति होती है : दिव्यानंद
मोरना। तीर्थनगरी शुक्रताल स्थित दंडी आश्रम में पूज्य भागवत संत ब्रह्मलीन स्वामी विष्णु आश्रम महाराज की 14वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानन्द तीर्थ महाराज ने भागवत कथा का रसपान कराया। महाभारत युद्ध में अर्जुन व भीष्म पितामह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया।
स्वामी दिव्यानन्द तीर्थ महाराज ने कहा कि जब धर्म अधर्म की रक्षा करने लगे, तो उसे नष्ट कर देना ही धर्म है। क्रियाओं को छोड़कर मनुष्य को चिंतन में नहीं फंसना चाहिए। क्रिया का नाम धर्म नहीं है। सही उद्देश्य के साथ किए गए कार्य ही धर्म है। इस प्रकार का उद्देश्य सही होगा तो ही धर्म का मार्ग प्रशस्त होगा। सुनीति पर चलकर हमेशा उत्तम वस्तु की प्राप्ति होगी। कार्यक्रम के आयोजक गुरुदत्त ब्रह्मचारी महाराज व स्वामी प्रबोधाश्रम जी महाराज रहे। यजमान के रूप में राजकुमार राज, पूनम राज रहीं। व्यवस्थापक के रूप में आचार्य गिरीश वशिष्ठ, आचार्य राजीव मिश्र, आचार्य उमाकांत द्विवेदी, दिनेश चंद पांडेय, बनवारी लाल शास्त्री, जगदीश वशिष्ठ, पुनीत कौशिक, गंगादत्त शर्मा, गोपाल शर्मा, मनोहर लाल शर्मा रहे।