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आखिरी मौके पर दांव चूक गए पारस

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आखिरी मौके पर दांव चूक गए पारस
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मुजफ्फरनगर। खतौली के चर्चित चेयरमैन रहे पारस जैन आखिरी मौके पर दांव चूक गए। भ्रष्टाचार के आरोपों में उलझे रहे पारस का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। उनके अधिकार तक भी सीज कर दिए गए थे। बावजूद इसके हाईकमान पर उनका जादू खूब चला। क्षेत्रीय नेताओं की नाराजगी के बावजूद वह भाजपा से अपनी मां रितु जैन को
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टिकट दिलाने में कामयाब हो गए। किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। केवल नौ मतों से उनकी मां चेयरमैन बनने से चूक गईं।भाजपा नेता पारस जैन चेयरमैनी के अपने कार्यकाल के कारण जिले में सर्वाधिक चर्चित रहे। चाहे उनकी आयु का मामला रहा हो या फर्जी प्रमाण पत्रों का, विवादों से उनका नाता रहा। सभासदों के साथ उनका विवाद रहा हो या ठेकेदारों से कमीशन के झगड़ों की शिकायतें। पारस जैन के अधिकार जांच के बाद प्रशासन ने सीज कर दिए थे। सफाई कर्मचारियों को भी लंबे समय तक उनके खिलाफ इसलिए धरने पर बैठना पड़ा कि उनका फंड आदि का पैसा दूसरे मदों में खर्च कर दिया गया था। तमाम आरोपों से घिरे होने के कारण किसी को यह उम्मीद नहीं थी भाजपा उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दे देगी। भाजपा के कुछ नेताओं से अपने संबंधों के चलते पारस जैन अपनी मां रीतु जैन को टिकट दिलाने में फिर कामयाब हो गए। पार्टी हाईकमान ने यह फैसला तब लिया, जब क्षेत्रीय विधायक विक्रम सैनी समेत कई भाजपाई पारस को प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में थे। उनकी मां के टिकट की घोषणा के बाद दावेदार मदन छाबड़ा ने पार्टी से विद्रोह कर दिया। भाजपा ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन उन्होंने मोर्चा खोले रखा और अपनी पत्नी अनीता रानी को चुनाव लड़वाया। पारस जैन की मां रितु की हार के पीछे अनीता रानी को मिले मतों की भी अहम भूमिका है। अनीता 5152 मत देने में कामयाब रही, जबकि रितु को 10840 मत मिले। अंतत: उन्हें सपा की बिलकिस बानो से महज नौ मतों से हार का मुंह देखना पड़ा। सियासी दांव में माहिर पारस जैन को भी चुनाव की बाजी में मिली शिकस्त से हर कोई अचंभे हैं। जिले में खतौली पालिका में भाजपा की हार की हर जगह चर्चा है। बताते चलें कि भाजपा नेता राजा वाल्मीकि के मर्डर में भी पारस जैन भीड़ के गुस्से का शिकार बने थे। पुलिस ने उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखा था। हालांकि बाद में उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी। - रणवीर सैनी
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