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बीज की तरह फलित होते हैं पुण्य-पाप: शुक्ल

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मुजफ्फरनगर। भागवताचार्य वेदप्रकाश शुक्ल ने कहा कि मानव जीवन में पाप और पुण्य बीज की तरह फलित होते हैं। पाप करोगे तो वह भी सामने आएगा और पुण्य करोगे तो वह भी सामने आएगा। सब हिसाब यहीं हो जाता है।
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शामली रोड स्थित सत्संग भवन में श्रीमद्भागवत कथा महापुराण की ज्ञान गंगा में वेदप्रकाश शुक्ल ने कहा कि मानव जीवन में पुण्यों का फल सुख, शांति और समृद्धि होती है, ऐश्वर्य और वैभव प्राप्त होता है। पाप का फल मनुष्य को दुख, ताप, संताप, दरिद्रता देता है। कथा व्यास ने कहा कि कश्यप का अर्थ है, वह अदृष्य शक्ति जो दृष्टा बनकर चेतन तत्व के रूप में सबको देख रही है। इसी चेतन शक्ति की दो पत्नी दिति और अदिति हैं, जिनका सीधा अर्थ है भेद वाली बुद्धि और अभेद वाली बुद्धि, अर्थात अपना पराया, तेरा-मेरा, इसका-उसका, यहां का वहां का, इस प्रकार से जो बुद्धि टुकड़े-टुकड़े कर रही है, सबको बांट रही है और सबको अलग-अलग दृष्टि से देख रही है वह भेद वाली बुद्धि है। जो किसी भी प्रकार का भेद न मानकर संपूर्ण विश्व धरातल को हरि के रूप में देख रही है।
सब में केवल परमेश्वर का दर्शन कर रही है, उसी बुद्धि का नाम है अभेद बुद्धि। दिति नाम भेद बुद्धि से ही हिरणा कश्यप जैसे महाराक्षस पैदा होते हैं, जिसका सीधा अर्थ लोभ और भोग है। इन वृत्तियों से मनुष्य का देवत्व लोप हो जाता है। कथा में यज्ञमान संजीव बंसल सपत्नीक रहे। व्यास पीठ का पूजन त्रिलोकचंद गुप्ता, श्यामलाल बंसल, ताराचंद वर्मा, शिवकुमार सिंघल, श्रीचंद तायल, होतीलाल शर्मा ने किया। महेंद्र गोयल, ओमप्रकाश, श्यामलाल, सरोज वर्मा, सविता मलिक, विद्यावती, डॉ मुकेश, मिथलेश, प्रवीण अरोरा, प्रेमप्रकाश अरोरा, रामकिशन वर्मा आदि का सहयोग रहा।
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