जीआईसी की किलेबंदी कर लगा दिए थे ताले
मुजफ्फरनगर। भीड़ को देखकर आभास हो गया था, लेकिन विवश शिक्षक कुछ नहीं कह सके। जीआईसी के मैदान से गूंजती नारों की आवाज के कारण मूल्यांकन कार्य में लगे परीक्षक भी हैरान हो गए। हिंसा भड़की तो कॉपियां जांचने में लगे शिक्षक भी व्याकुल हो गए। स्थिति ऐसी बनी कि प्रशासन ने तत्काल जीआईसी की किलेबंदी कराकर ताले लगवा दिए। करीब आठ घंटे तक 50 शिक्षक कैद रखे गए। इन्हें पानी पीने तक की मोहलत भी नहीं मिल पाई।
यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य 17 मार्च से प्रारंभ हो गया था। जनपद में लगातार परीक्षकों की कमी के आगे व्यवस्था डांवाडोल रही। 31 मार्च मूल्यांकन पूर्ण करने का समय था, मगर विषय विशेषज्ञों की के टोटे के कारण आखिरकार, विभाग को मूल्यांकन कार्य आगे बढ़ाना पड़ा। 2 अप्रैल को हरहाल में सभी उत्तपुस्तिकाएं जांचने का लक्ष्य रखा गया। क्योंकि हिंदी की करीब 2 हजार और गृह विज्ञान की 1000 कॉपियां बाकी थी, जिनका 2 अप्रैल को लगभग 50 परीक्षक लगाकर मूल्यांकन कराया जा रहा था। जीआईसी मुख्य मूल्यांकन केंद्र था, इसी के सामने मैदान में आंदोलनकारी जुटे थे। सुबह से ही प्रदर्शनकारियों की गूंजती नारेबाजी और शोर-शराबे के कारण मूल्यांकन बिगड़ता चला गया। दोपहर तक स्थिति शहर में उपद्रव की बनी तो शिक्षक भी घबरा गए। मूल्यांकन केंद्र के आसपास जुटती भीड़ और तोड़फोड़ करते युवकों को देखकर शिक्षक, शिक्षिकाएं सहम गए। आनन-फानन में केंद्र पर करीब डेढ़ दर्जन अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया। इसके बाद जीआईसी केंद्र की पूरी तरह किलेबंदी कर दी गई। मूल्यांकन में लगे करीब 50 परीक्षकों को कमरों में कैद कर मूल्यांकन कराया गया। शहर में उपद्रव, हिंसा के हालातों को देखते हुए करीब आठ घंटे तक परीक्षक दहशत में कैद रहे, जो कि दिन ढलने और सुरक्षा के बीच निकाले गए। उपद्रव के कारण बिगड़ी स्थिति के चलते मूल्यांकन कार्य 03 अप्रैल को पूरा किया गया। जीआईसी के प्राचार्य रमेशचंद शर्मा ने बताया कि मूल्यांकन केंद्र को उपद्रव के दौरान तालों में कैद कर दिया गया था, मूल्यांकन कार्य प्रभावित हुआ। हिंसा को देखकर शिक्षक घबरा गए थे, हालांकि प्रशासन से केंद्र पर पुलिस बल लगवा दिया था।