घर की लक्ष्मी का सम्मान करो
खतौली (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में विजय कौशल महाराज ने भगवान शंकर का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शंकर जैसे देखने में हैं वैसे ही अंदर से हैं। जबकि मनुष्य जैसा अंदर से होता है वैसा बाहर से नहीं होता है। बाहर से कुछ और नजर आता है, जबकि अंदर से कुछ और होता है।
केके जैन एजूकेशन सभा स्थल पर आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास महाराज ने कहा कि मनुष्य का जन्म केवल एक बार होता है। केवल एक ही परिवार इस दुनिया में ऐसा है कि जिसमें कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ। भगवान राम के परिवार में झगड़ा हुआ। जिसमें भगवान राम को वनवास जाना पड़ा। केवल शिव परिवार ही एक ऐसा परिवार है। जिसमें कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ। अगर परिवार में खुशी चाहते हो तो केवल घर में पत्नी का सम्मान कीजिए। अगर घर में लक्ष्मी चाहते हो तो घर में स्त्री का सम्मान करना चाहिए। सर्वाधिक सम्मान केवल गृहणी का करना चाहिए। भगवान का कोई रुप नहीं है। भगवान का कोई नाम नहीं है। जैसा रुप भक्त देता है वही रुप है और जो नाम भक्त ने दे दिया वही नाम है।
कथा में मुख्य रूप से समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत, मीनाक्षी बंसल, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली, अतुल, पवन, मनोज, अमित बंसल, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनीत ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल, संदीप रोधीया आदि उपस्थित रहे।