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रेलवे ट्रैक पर झटका लगने पर एक घंटे तक ट्रेनों का संचालन रोका

Tue, 05 Sep 2017 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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रेलवे ट्रैक की मरम्मत करते कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब से चलकर दिल्ली जा रही पैसेंजर ट्रेन को गंगनहर के लोहे के पुल से निकलते ही तेजी के साथ झटका लगा। हादसे की भय से ट्रेनों का आनन-फानन में संचालन रोकना पड़ा। रेलवे ट्रैक खराब होने की सूचना से रेलवे अधिकारियों में अफरातफरी मच गई। कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने रेलवे ट्रैक को चेक किया। चेक करने पर रेलवे ट्रैक खराब नहीं मिला। करीब एक घंटे बाद ट्रेनों का संचालन शुुरू कराया गया। 
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सोमवार की शाम को पंजाब से चलकर दिल्ली जा रही एक खाली पैसेंजर ट्रेन को गंगनहर के लोहे के पुल से निकलते ही तेजी के साथ झटका लगा। ट्रेन चालक को आभास हो गया कि रेलवे ट्रैक खराब हो गया था। इस ट्रेन में एक भी यात्री नहीं था। इसके चालक ने ट्रेन को खतौली रेलवे स्टेशन पर रोककर स्टेशन मास्टर को ट्रैक खराब होने की सूचना दी। रेलवे ट्रैक के खराब होने की जानकारी मिलने पर स्टेशन मास्टर ने तुरंत कंट्रोल रूम और पीडब्ल्यूआई को इसकी सूचना दी।

रेलवे ट्रैक के खराब होने की सूचना से रेलवे अधिकारियों में खलबली मच गई। स्टेशन मास्टर ने शालीमार एक्सप्रेस ट्रेन को स्टेशन पर ही रोक दिया। उधर, सकौती में उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन को रोक दी। इस तरह से ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। आनन-फानन में ट्रैक मैन और गैगमैनों की टीम मौके पर पहुंची। रेलवे कर्मचारियों की टीम ने बुआड़ा फाटक से लेकर रेलवे के लोहे के पुल तक रेलवे ट्रैक को बारीकी के साथ चेक किया। कर्मचारियों को चेक करने पर ट्रैक में खराबी नहीं मिली, तब कहीं जाकर अधिकारियों ने राहत की सास ली। करीब एक घंटे तक ट्रेनों का संचालन बंद रहा। 
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ओएचई वायर ठीक करने का काम जारी 
खतौली। रेलवे ट्रैक पर इंजीनियर अब ओएचई (ओवरहेड इलेट्रिफिकेशन) वायरों को ठीक कराने में लगे हैं। जबकि ट्रेन दुघर्टना स्थल पर 15 दिन बाद भी ट्रैक के स्लीपरों को बदलने में कर्मचारी लगे हुए हैं। इसके बावजूद अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। सभी ट्रेनों को कॉशन लेकर धीमी गति से निकाला जा रहा है। 

जगत कालोनी के सामने 19 अगस्त की शाम को उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसा हुआ था। हादसे के एक दिन रेलवे अधिकारियों ने दुघर्टना स्थल पर नया ट्रैक तैयार कराकर ट्रेनों का संचालन शुरू करा दिया था। उसी दिन से कर्मचारी रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने में लगे हैं। अब दुर्घटनास्थल पर स्लीपरों का काम चल रहा है। 15 दिन बीत जाने के बावजूद भी काम खत्म नहीं हो सका है। रेलवे विभाग के इंजीनियर अब रेलवे ट्रैक के ओएचई वायरों को ठीक कराने में लगे हुए हैं।

इंजीनियरों ने बताया कि अक्सर ओएचई वायरों में फाल्ट होने की वजह से ट्रेनों का संचालन बाधित हो जाता है। ट्रेनों का संचालन बाधित न हो, इसलिए इन वायरों को ठीक कराया जा रहा है। इन वायरों को ठीक करने के लिए तीन चार दिन का समय लग सकता है। इसके बावजूद ट्रेन दुर्घटनास्थल पर बनाए गए रेलवे ट्रैक के ऊपर से अभी भी कॉशन लेकर सभी ट्रेनों को 10 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से निकलवाया जा रहा है।
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