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संस्कृति से दूर होने के कारण युवा पीढ़ी अवसाद में: आचार्य

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ज्ञान, योग, अहिंसा, करुणा हमारी पहचान के आधार
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मुजफ्फरनगर। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी जितना संस्कृति से दूर होती जा रही है, उतनी ही अवसादग्रस्त हो रही है। हमें अपने बच्चों को मांसाहार और नशे की लत से बचाना चाहिए। ज्ञान, योग, अहिंसा, करुणा हमारी संस्कृति के आधार हैं।
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दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना में शुक्रवार से महाराज श्री का मंगल वर्षा योग प्रारंभ होगा। बरसात के दौरान चार माह तक वह वहलना में ही रहेंगे। वहलना में पत्रकारों से वार्ता में ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि आज समाज में 14 से लेकर 25 साल तक युवा भी अवसाद में दिखाई दे रहे हैं। हम अध्यात्म से दूर होते जा रहे हैं और पाश्चात्य संस्कृति की चपेट में आ गए हैं। इसी कारण हम तनाव में हैं। अध्यात्म से जुड़े रहने से तनाव से मुक्ति मिलती है। योग, ज्ञान, अहिंसा और करुणा ये हमारी संस्कृति की पहचान है। हमारा जीवन व्यसनमुक्त होना चाहिए। हमारे बच्चे नशाखोरी और मांसाहार से दूर रहने चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि प्रकृति से हमें कतई छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। प्रकृति को कंट्रोल करना किसी के हाथ में नहीं है। आचार्य ने कहा कि अपने घरों को स्वर्ग बनाएं। परस्पर सभी प्रेमपूर्वक रहें। जीवन में साहस और धैर्य रखें। टीवी देखते हुए भोजन नहीं करें। भौतिक संसाधनों को अति प्रयोग और दुरुपयोग न करें। ज्ञान सागर महाराज अब तक 86 जेलों में कैदियों को संबोधित कर चुके हैं। उनकी वाणी को सुन बहुत से लोग अपराध से तौबा कर चुके हैं। सात जुलाई को दोपहर एक बजे वर्षायोग मंगल कलश स्थापना होगी। इस अवसर पर प्रबंध समिति के नरेंद्र कुमार जैन, श्रेयांस जैन, विरेंद्र जैन, राजेश जैन, पंकज जैन, संजय जैन, पवन कुमार जैन, राजकुमार जैन, देवेंद्र जैन, जितेंद्र जैन, रजनीश जैन, सतीश चंद जैन, दिनेश जैन, अनिल जैन, संजय जैन, राजीव जैन आदि मौजूद रहे।
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