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मुजफ्फरनगर दंगाः उम्मीद की किरण बनी फौज

Thu, 12 Sep 2013 12:02 AM IST
विनीत त्रिपाठी/मुजफ्फरनगर
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दंगे की आग में झुलस रहे मुजफ्फरनगर-शामली को अंत में फौज के हवाले करना पड़ा। आम नागरिकों के जहन से अपना इकबाल खो चुकी पुलिस और प्रशासन के बीच फौज उम्मीद की किरण बनकर आई।
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फौज ने कमान संभालते ही क्षेत्र में बड़ी सूझबूझ से पकड़ मजबूत की। शहर से लेकर गांव तक के तनावग्रस्त इलाकों में फ्लैग मार्च कर लोगों के दिलों पैदा खौफ को कम करने का काम किया।

27 अगस्त को कावल से शुरू हुई दंगे की चिंगारी सात सितंबर तक शोला बन चुकी थी।

सात सितंबर की रात जब सिविल प्रशासन के हाथ से मामला निकला, तो देर रात मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी ने मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स से संपर्क साधा और एक्कीजीशन की मांग की।
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8 सितंबर को सुबह दो बजे सेना को मूव करने के लिए तैयार रहने की सूचना दी गई। तीन बजे सेना को मूव करने के आदेश मिले।

एक घंटे के अंदर चार्जिंग रैम डिवीजन और पाइन डिवीजन के करीब साढ़े छह सौ अफसर-जवान फोर्स कमांडर ब्रिगेडियर जगदीप सिंह के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर के लिए कूच कर दिया।

ब्रिगेडियर जगदीप सिंह ने बताया कि सुबह छह बजे फौज की सभी टुकड़ी मुजफ्फरनगर पहुंची।

जिला प्रशासन के साथ कान्फ्रेंस होने के बाद सुबह आठ बजे सबसे पहले डिप्टी कमांडर कर्नल आरके चौहान के नेतृत्व में शहर में फ्लैग मार्च शुरू किया।

शहर के 10 किमी के दायरे में करीब 190 जवानों की तीन कॉलम ने पांच घंटे लगातार फ्लैग मार्च किया, जिससे देर शाम तक शहर में हालात काफी हद तक नियंत्रित किया गया। साथ ही पांच कॉलम फोर्स को ग्रामीण इलाकों में लगाया गया।

दंगे पर नियंत्रण
दंगाई क्षेत्र में पहुंचकर फौजियों ने सबसे पहले बलवाइयों को तितरबितर कर उन्हें डॉमिनेट किया। इस दौरान क्षेत्र में फंसे बच्चे, बूढे़, महिलाओं को वहां से निकालकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

साथ ही उक्त क्षेत्र में अराजकतत्वों की भीड़ को समाप्त करना भी स्ट्रेटजी का हिस्सा था। दंगे में चोटिल लोगों को तत्काल चिकित्सा उपचार भी उपलब्ध कराए गए।

जलते घरों से निकाला
शाहपुर के कुटबा-कुटबी में आठ सितंबर को घरों में आग लगने की सूचना पर कर्नल एके यादव के नेतृत्व में पहुंचे सैनिकों ने जलते घरों के अंदर से 200 लोगों को निकाला।

वहीं खरड़ गांव में सरपंच बिजेंद्र सिंह के घर से 125 लोगों को सुरक्षित बचाया गया। वहीं शामली में तनाव पैदा होने की सूचना पर पहुंचे कर्नल कुमार बीएस ने दोनों लोगों को समझा कर तनाव समाप्त कराया।

मीरापुर में बचाई जान
नौ सितंबर को मीरापुर में एक समुदाय द्वारा दंगा भड़काने की रणनीति बनाने की सूचना पर कर्नल आरके राणा मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर मामले को शांत किया।

इस दौरान एक समय ऐसा था जब बलवाई और सेना आमने-सामने थी, लेकिन लोगों का भरोसा ही था कि कई मासूम लोगों की जान बच सकी।

गूगल ने आसान की राह
मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद मेजर कोशांक लांबा ने भौगोलिक समस्या को हल करना शुरू किया।

मेजर लांबा ने गूगल की मदद से मुजफ्फरनगर-शामली के दंगा प्रभावित इलाकों का मैप निकाला और सभी सेक्टर प्रभारियों का सौंपा, जिससे सभी को क्षेत्र की स्थिति का अंदाजा हो सका।

साथ ही ये आंकड़े भी निकाले कि किस क्षेत्र में मुस्लिम और किस क्षेत्र में जाट समुदाय की बहुलता है। जातीय आंकड़ों के आधार पर जवानों को क्षेत्रों में भेजा गया, ताकि वहां सुरक्षा का भरोसा दिलाकर लोगों का गुस्सा शांत किया जा सके।

ब्रिगेडियर जगदीप सिंह का कहना है कि जिन इलाकों में 50-50 प्रतिशत हिंदू-मुस्लिम थे या फिर जहां ये आंकड़ा 90-10 प्रतिशत का था। उन इलाकों में तनाव नहीं था, लेकिन जिन इलाकों में हिंदू-मुस्लिम का प्रतिशत 70-30 था, वहां दोनों समुदायों ने एक-दूसरे को दबाने की कोशिश में मारकाट की।

पीड़ितों तक पुलिस-प्रशासन
ब्रिगेडियर जगदीप सिंह का मानना है कि अब ग्रामीण इलाकों में कानून-व्यवस्था को बहाल करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। पीड़ित गांववालों के पास पुलिस प्रशासन को पहुंचकर ईमानदारी से काम करना होगा। साथ ही सुरक्षा कमेटी को मजबूत कर लोगों में विश्वास जगाना होगा।

फ्लैग मार्च से मिटा खौफ
मुजफ्फनगर शहर से लेकर शामली मोरना, बुढ़ाना, शाहपुर, शामली, भोकरहेड़ी के इलाकों में बरपे बलवाइयों के कहर के बाद हर सख्श की आंखों में खौफ था।

खौफ के साये में लोग घरों में कैद थे, लेकिन जैसे-जैसे सेना की दस्तक गांव में हुई, लोगों के दिलों में न्याय की उम्मीद जगी।

इन इलाकों में फौज के फ्लैग मार्च के चौथे दिन भोकरहेडी में सड़कों पर न सिर्फ चहल-पहल थी, बल्कि घर बाहर चौपाल लगी थी और पहली बार बाजार गुलजार दिखाई दिए।

फ्लैग मार्च करते फौजी लोगों को ढांढस बंधाते नजर आए। मोरना-शाहपुर में तैनात सैन्य कॉलम के प्रभारी कर्नल आरके राणा के निर्देश पर मेजर प्रकाश भट्ट करीब 40 जवानों की टुकड़ी, डीएसपी और मजिस्ट्रेट के साथ भोकरहेडी क्षेत्र में फ्लैग मार्च करने निकले।

फ्लैग मार्च के दौरान सिकंदरापुर शिव मंदिर जा रहे विकलांग ब्रजनाथ ने फौजी को बताया कि सात सितंबर की रात अचानक हुये हादसे से वे इतना डर गए थे कि दो दिन मंदिर से बाहर ही नहीं निकले।
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