उत्तर प्रदेश में हिंसा के बाद मंगलवार को बहावड़ी में शांति बहाली के प्रयास करने पहुंचे अफसरों के सामने पुलिसिया कार्रवाई पर लोगों ने अपना गुस्सा उतारा।
महिलाओं ने कहा कि फुगाना पुलिस के रवैये से लोग भयभीत हैं। आरोप लगाया कि लाइसेंस चेक करने के नाम पर लोगों को उठाकर 302 में पुलिस बंद कर रही है। दहशत के मारे गांव के मर्द भी घर में नहीं रहते और बच्चे स्कूल नहीं जाते।
मंगलवार की दुपहर बाद जिलाधिकारी प्रवीण कुमार, अपर जिलाधिकारी प्रताप सिंह भदौरिया, एसडीएम शामली आदि अफसर बहावड़ी गांव पहुंचे तो अपना दुखड़ा सुना रही एक महिला बेहद भावुक हो गई और रोने लगी।
उसने अफसरों से कहा कि पुलिस बेकसूरों को जेल भेज रही है। उनकी मान मर्यादा का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा। पुलिस पूरी तरह एकतरफा कार्रवाई करने पर तुली है। कम से कम किसी को जेल भेजने से पहले जांच तो कर लेनी चाहिए कि वह दोषी है भी या नही।बच्चे डर के मारे स्कूल नहीं जा रहे।
महिला ने कहा कि ऐसे हालात में तो अब या तो वह गांव छोड़कर चले जाए या फिर आत्महत्या कर लें। इसके सिवा तो उनके पास कोई और चारा नहीं है। यही नहीं 10वीं के छात्र को भी पुलिस उठाकर ले गई।
एक महिला ने कहा कि दोपहर को पुलिस वाले उनके घर आए और उसके पति से शस्त्र लाइसेंस मांगा। उन्होंने लाइसेंस और रायफल लाकर दी तो पुलिस उन्हें रायफल समेत उठाकर ले गई। उन्होंने फुगाना थाने के चक्क र काटे, तो पता चला कि उनका 302 में चालान कर दिया है।