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तब कल्याण, अब कवाल ने निकाली साइकिल की हवा

Wed, 18 Sep 2013 11:47 AM IST
चन्द्रमोहन शर्मा/अमर उजाला बागपत
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लब पर आते आते, हाथों से जाम छूट जाता है...। समाजवादी पार्टी के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। मुस्लिमों को रिझाने के लिए तमाम जतन किए जाते हैं लेकिन लोकसभा चुनाव आते ही बात बनते बनते बिगड़ जाती है।
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2009 में कल्याण सिंह से दोस्ती ने साइकिल की हवा निकाल दी थी तो अब कवाल कांड ने मुस्लिमों को नाराज कर दिया है।

जैसे अब मुस्लिमों को मनाने के लिए तमाम फंडे अपनाए जा रहे हैं, वैसे ही तब भी खूब कोशिशें की गई थी। इस बार अभी तक एक तो सहारनपुर के पूर्व विधायक इमरान मसूद को सपा ज्वाइन कराई गई है, दूसरा बागपत से गुलाम मोहम्मद को टिकट दिया गया है।

माना जा रहा है कि जल्द ही सपा के मुस्लिम प्रत्याशियों की लिस्ट थोड़ी और लंबी हो सकती है। 2009 में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने हिन्दू हृदय सम्राट की छवि रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से हाथ मिला लिया था।
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इसी से मुस्लिम नाराज हो गए थे। गुस्सा भी ऐसा था कि सपा हाईकमान के पसीने छूट गए। मुलायम सिंह खुद दारूल उलूम देवबंद में उलेमा को मनाने पहुंचे थे। मुस्लिमों को टिकट भी खूब दिए गए थे।

पश्चिमी में सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद मंडल में सहारनपुर से रशीद मसूद, कैराना से शादान मसूद, मेरठ से शाहिद मंजूर, मुरादाबाद से रिजवान, संभल से इकबाल, अमरोहा से महबूब अली उम्मीदवार थे लेकिन इनमें से एक भी नहीं जीत पाया।

इससे पहले 2004 के चुनाव में सपा का रालोद से गठबंधन था। तब जाट-मुस्लिम कार्ड खूब चला था। प्रदेश से कुल 11 मुस्लिम सांसद चुने गए थे। इनमें सपा से सात थे।

शायद उसी समीकरण को ध्यान में रखकर इस बार भी तैयारी की गई थी। जाटों को रिझाने के लिए सोमपाल शास्त्री (बागपत), अनुराधा चौधरी (बिजनौर), सुधन रावत (गाजियाबाद) को टिकट दिए गए।

राजेन्द्र चौधरी को काबीना मंत्री बनाया गया। बाद में अनुराधा का टिकट कटा, तो लालबत्ती दी गई। बागपत में पूर्व विधायक साहब सिंह को भी राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया लेकिन अचानक से खेल ऐसा बिगड़ा कि अब जाट और मुस्लिम दोनों ही नाराज बताए जा रहे हैं।

शायद इसीलिए सोमपाल शास्त्री ने मुजफ्फरनगर हिंसा को वजह बताकर बागपत से टिकट लौटा दिया। अब देखना यह है कि सपा मिशन 2014 के लिए अपने बिगड़े समीकरण कैसे बनाती है? कोशिश हर स्तर पर की जा रही है।
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