भाजपा नेता योगेश जब कमरे में गोलियां चला रहा था तो चचेरा भाई अक्षय छत के रास्ते से अंदर जाने की कोशिश करने लगा। योगेश ने सीढ़ियों का दरवाजा बंद कर दिया, तो अक्षय वहीं से चिल्ला-चिल्लाकर ऐसा न करने की बात कहता रहा मगर योगेश नहीं माना।
सांगाठेड़ा में जब योगेश ने पहली गोली चलाई, तो बराबर के कमरे में रहने वाले उसके चचेरे भाई अक्षय को अनहोनी का अहसास हुआ। दरवाजा बंद देखकर वह छत के रास्ते से घर में घुसने की कोशिश करने लगा। वहां से अक्षय ने उसे रोकने की कोशिश की।
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नेहा को अस्पताल ले जाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
अक्षय ने कहा कि भइया, ये क्या कर रहे हो। इसी दौरान योगेश ने सीढ़ियों का दरवाजा बंद कर दिया, जिससे अक्षय वहीं पर फंस गया। अक्षय ने वहां पर लगी खिड़की का शीशा तोड़ा और शोर मचाया। इसके बाद परिवार के अन्य लोग वहां पहुंचे।
गांव सांगाठेड़ा में वारदात के बाद पहुंची पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
मेरी बहन को कर रखा था परेशान, कई बार योगेश को समझाया
वारदात की सूचना मिलते ही नेहा का भाई रजनीश भी गांव में पहुंचा। रजनीश ने बताया कि योगेश पिछले काफी समय से उसकी बहन को प्रताड़ित कर रहा था। कई बार नेहा ने फोन पर अपनी तकलीफ बताई। इसके बाद परिवार ने योगेश को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह इतना खौफनाक कदम उठा लेगा। उधर, गांव सांगाठेड़ा में जब यह दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, तो ग्रामीणों में भी भारी आक्रोश देखा गया। तीन मासूम बच्चों की निर्मम हत्या से पूरा गांव स्तब्ध है।
सख्त कार्रवाई करें पुलिस
योगेश रोहिला की चाची मीना व बुआ उर्मिला रोते हुए कह रही थी कि मेरे देव, शिव, बहू व लाड़ली पोती को गोली मारने वाले निर्दयी को पुलिस किसी भी कीमत पर न छोड़े। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। कह रही थीं कि शक ने उनके हंसते खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया। योगेश के शक के कारण ही 17 साल पहले मेरे परिवार के पांच लोगों की जान इसी मकान में चली गई थी।
तीन-चार माह से बदल गया था व्यवहार
योगेश रोहिला के पिता संघ में प्रचारक की मुख्य भूमिका में रहे हैं। इसी के चलते वह राजनीति में आया और लगातार ब्लॉक, तहसील, जिला स्तर तक की राजनीति करता रहा। करीब तीन-चार महीने पहले अचानक उसकी राजनीति में सक्रियता कम होती चली गई। वह अधिक समय अपने घर पर ही बिताने लगा। इस दौरान उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा। ग्रामीणों के अनुसार, अब वह सामान्य नहीं दिखता था। इसके चलते वह अधिकतर घर या अपने कैंप कार्यालय पर ही रहता था। वह अपनी पत्नी की रेकी भी करता था।