गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी को शुक्रवार को अदालत ने चार साल की सजा सुनाई, जिसके बाद अंसारी परिवार की एक पीढ़ी सियासत से बाहर हो गई। हालांकि अंसारी परिवार की नई पीढ़ी के दो सदस्य अब्बास अंसारी और सुहेब अंसारी उर्फ मन्नू अंसारी अभी भी विधायक हैं। अब्बास भी जेल में हैं।
उल्लेखनीय है कि अंसारी परिवार के तीन सदस्य अफजाल अंसारी, मुख्तार अंसारी और सिगबतुल्लाह अंसारी बीते कई दशकों से सक्रिय राजनीति में रहे हैं। मुख्तार को पहले भी तीन बार सजा सुनाए जाने की वजह से चुनाव लड़ने पर बंदिश लग चुकी है।
0सिगबतुल्लाह ने बीते विधानसभा चुनाव में खुद को सक्रिय राजनीति से अलग रख कर अपने बेटे सुहेब उर्फ मन्नू अंसारी को मोहम्मदाबाद सीट से सपा का टिकट दिलाया था। मन्नू चुनाव जीतकर विधायक बने। जानकार बताते हैं कि सत्ता बदलने के साथ ही अंसारी परिवार ने अपने ऊपर मंडराते खतरे को भांप लिया था।
इसी वजह से नई पीढ़ी को राजनीति में लाने के फैसले में देर नहीं की। मुख्तार का बेटा अब्बास अंसारी वर्तमान में मऊ से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का विधायक है। वहीं, मन्नू अंसारी मोहम्मदाबाद सीट से सपा का विधायक है। फिलहाल मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी ने राजनीति में पदार्पण नहीं किया है।
यहां बताना जरूरी है कि मुख्तार और अफजाल की तरह अब्बास अंसारी की विधायकी पर भी कम खतरा नहीं है। अब्बास के खिलाफ एक शस्त्र लाइसेंस पर गैरकानूनी तरीके से कई असलहे खरीदने समेत कई मुकदमे चल रहे हैं। इसी तरह उमर पर भी कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में उमर अभी फरार चल रहा है।
अफजाल को पहली बार सजा
गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी को पहली बार सजा हुई है। चार साल की सजा होने पर संसद की सदस्यता जानी तय है। अभियोजन निदेशालय ने उनकी सांसदी खत्म करने के लिए लोकसभा सचिवालय को पत्र भी लिख दिया है। वहीं मुख्तार को आठ माह में चौथी बार सजा सुनाई गई है। मुख्तार को इससे पहले सितंबर 2022 में दो मामलों में दो-दो वर्ष की सजा, दिसंबर 2022 में 10 वर्ष की सजा और शुक्रवार को गैंगस्टर एक्ट में 10 वर्ष की सजा हो चुकी है। हालांकि एक पहलू ये भी है कि मुख्तार पर इन चारों सजा का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वह बीते 14 वर्ष से अधिक वक्त से जेल में है।
मुख्तार अंसारी के खिलाफ दर्ज नौ मुकदमों में बीते चार साल के दौरान अभियोजन निदेशालय ने आरोप तय कराने में सफलता पाई है। हालिया मुकदमे में भी 12 साल बाद आरोप तय हो सके थे। दरअसल, बड़े माफिया अदालती प्रक्रिया में सेंध लगाकर आरोप तय नहीं होने देते हैं। पहली बार अभियान चलाकर माफिया के खिलाफ दर्ज मुकदमों में आरोप तय कराए जा रहे हैं। -आशुतोष पांडेय, एडीजी, अभियोजन निदेशालय