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मिलिए, उम्र की सेंचुरी मार चुके इन 'जवां' लोगों से

Wed, 29 May 2013 12:18 AM IST
बागपत/चन्द्रमोहन शर्मा
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भारतीय संस्कृति में पहला आशीर्वाद शतआयु का ही मिलता है, लेकिन बहुत कम लोग ही ऐसे मिलते हैं, जो उम्र के सैकड़े को छू पाते हैं।
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लेकिन बागपत के सरूरपुर में एक-दो नहीं, बल्कि 10 से अधिक लोग ऐसे हैं जो अपनी आयु के 100 वर्ष पूरे कर चुके हैं और आज भी पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

शतआयु जीने वालों का सीधा सा मंत्र है- अधिक से अधिक पैदल चलो और टेंशन को पास फटकने मत दो। इसी से लग जाएगा उम्र का शतक।

105 वर्ष की गंगादेई की धेवती के भी पोते हो चुके हैं। मतलब, उनकी आंखों के सामने उनकी छठी पीढ़ी है। सुनाई कम देता है, लेकिन जीने की सीढ़ियां आसानी से चढ़ जाती हैं। उनकी बेटी बुगली 85 साल की है। बेटे भी 75 से ऊपर हैं। पड़ धेवतों की आयु 30 वर्ष है।

















107 के हो चुके मीरू खेत में रहते हैं। अभी भी पैदल खेत पर जाते हैं। शाम को एक रोटी खाते हैं और दूध पीकर सो जाते हैं। उनका बेटा बारू 80 वर्ष का है। पड़पोते की आयु 19 वर्ष है।
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100 वर्ष की हो चुकीं भूरो अंग्रेजों के समय के किस्से सुनाती हैं। आजाद हिन्द फौज में सिपाही रहे उनके पति श्याम सिंह तीन साल पहले 98 की उम्र में दुनिया छोड़ गए। श्याम सिंह 1935 में सिंगापुर में लापता हो गए थे और पांच साल बाद घर लौटे थे।

















102 के अजब सिंह के भाई आशाराम भी स्वतंत्रता सेनानी रहे। उनका निधन इसी साल 16 फरवरी को 104 की उम्र में हुआ। उनके सबसे छोटे बेटे करण (70) उनकी देखभाल करते हैं।

















कालू ने इसी साल उम्र का शतक पूरा किया है। सुनाई कम देता है, लेकिन घर की हर बात का ध्यान रखते हैं। उनके बेटों की उम्र भी 75 से 80 के बीच है। सेंचुरी के इस क्लब में बिरम सिंह और ब्रह्मवती भी शामिल हैं। 95 के जय सिंह भी धीरे धीरे इसी ओर बढ़ रहे हैं।

















इनकी लंबी उम्र के और भी राज हैं। एक तो इन्हें अपने परिवार का भरपूर प्यार मिला है। नीम की ठंडी छांव में सोते हैं और प्रतिदिन पैदल चलते हैं। खान-पान में संयम रखते हैं। साथ ही किसी प्रकार का तनाव नहीं लेते।
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कैसे जिएं सौ साल
सीएमओ डा. जेपी शर्मा कहते हैं कि इतनी लंबी उम्र कुदरत की देन है। वैसे, अगर इंसान खुद को तनाव से दूर रखे, रोजाना कसरत करे, ताजा खाना खाए, खुली हवा में सांस ले तो दिर्घायु हो सकते हैं।
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