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तुम्हारी उंगलियों को सब्र ही करना नहीं आता...

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मुरादाबाद। आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर दीनदयाल नगर स्थित नेहरू युवा केंद्र में चल रहे खादी महोत्सव में बुधवार शाम कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था पर तीखे प्रहार किए।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत युवा कवि मयंक शर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ हुआ। युवा गीतकार मयंक शर्मा ने सीमा पर सैनिक और उसके परिवार के बीच फोन संवाद को गीत के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कहा, तुम्हारे आने की चाह में हैं, मगर जो आना विजय से आना। गजलकार राहुल शर्मा ने सुनाया मैं ऐसी गांठ हूं, जो धीरे-धीरे धीरे खुलती हैं, तुम्हारी उंगलियों को सब्र ही करना नहीं आता। चलो अपना सफर अब तय करें, अपने तरीके से तुम्हें चलना नहीं आता , हमें उड़ना नहीं आता। गीतकार योगेंद्र वर्मा व्योम में काव्य पाठ करते हुए कहा कि तेरे मेरे बीच जब खत्म हुआ आवेश, रिश्तों के अखबार में छपे सुखद संदेश। कहीं रही ना आपसी शेष हार या जीत, िलखे समय के पृष्ठ पर रिश्तों ने जब गीत।
वरिष्ठ शायर कृष्ण कुमार नाज अपनी शायरी का जादू चलाया। उन्होंने कहा कि हमने जब भी वक्त गुजारा मस्ती में यराने में, जब जी चाहा घर से निकले बैठ गए मयखाने में। उसको दुनिया की हर दौलत फीकी लगने लगती है, रम जाता है जब भी कोई दीवाना दीवाने में।
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वरिष्ठ हास्य व्यंग्य कवि, डॉ मक्खन मुरादाबादी ने कहा कि वो सबको खुश रखती थी, खुश ही रहती थी। एक नदी बहती थी अब नहीं बहती। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ आर सी शुक्ल ने कहा कि कविता साधु की उस कुटिया की तरह होती है, जहां पहुंचकर बदल जाता है व्यक्ति का मन। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ प्रदीप शर्मा ने की। मुख्य अतिथि उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी खादी एवं ग्रामोद्योग राजीव त्यागी रहे। संचालन योगेंद्र वर्मा ने किया।
खादी ग्रामोद्योग के उपमुमख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव त्यागी ने बताया कि महोत्सव में जिले के स्कूल कालेज के छात्र छात्राएं भी दो दो बैच में रोजाना प्रदर्शनी में स्कूलों की तरफ से आएंगे। प्रदर्शनी में एमडीए के वीसी मदुधुसुदन हुल्गी भी अपने परिवार के साथ पहुंचे और यहां लगे स्टॉल में खरीदारी की।
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