मुरादाबाद के मझोला थानाक्षेत्र में रहने वाली एक युवती से मिलने जुलने पर एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोप युवती के भाई और उसके दोस्तों पर है।
मामले की शिकायत मझोला पुलिस से की गई है। आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपी पक्ष ने पुलिस को बताया कि युवक उसकी बहन से छेड़खानी करता था, जिस वजह से उसे पीटा था।
सूर्य नगर में रहने वाले लालाराम शर्मा हरदोई के रहने वाले हैं। उनका बेटा अजय शर्मा (24) एक कंपनी में नौकरी करता था। उसका एक युवती से मिलना जुलना था।
अजय की मां विमला ने बताया कि दोनों की बात शादी तक जा पहुंची थी लेकिन बडे़ बेटे की शादी न होने की वजह से उन्होंने अजय की शादी युवती से कराने से मना कर दिया था।
इसके बाद भी अजय का युवती से मिलना जुलना था, आरोप है कि यह बात युवती के भाई को नागवार गुजरी। उसने 25 मार्च को घर के पास से ही अजय को अपने दोस्तों के साथ मिलकर पकड़ लिया।
वह अजय को अपने घर के अंदर ले जाकर पीटने लगा। आरोप है कि करीब 25 लोगों ने लाठी, डंडो और फट्टे से अजय की पिटाई की और बाद में पुलिस को सूचना दे दी। आरोप लगाया कि अजय उसकी बहन से छेड़खानी करता है।
सूचना पर पहुंची मझोला पुलिस ने लहूलुहान अजय को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय थाने में ले जाकर बंद कर दिया। परिवार वालों ने अजय का उपचार कराया। शुक्रवार देर रात उसकी तबीयत बिगड़ गई, शनिवार सुबह उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जहां पर दोपहर के वक्त अजय की मौत हो गई। परिवार वाले शव लेकर घर पहुंचे। मझोला पुलिस भी मौके पर पहुंची। एसएचओ मझोला विकास सक्सेना ने बताया कि इस मामले में युवती के भाई अजय, दीपक, और सोनू के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
अंजाम भुगतने की दी थी धमकी
अजय की मां ने बताया कि 24 मार्च को युवती ने फोन पर उनसे बात की थी। वह अजय से शादी की जिद कर रही थी, शादी न होने पर उसने अजय को अंजाम भुगतने की धमकी दी थी, इसके एक दिन बाद ही अजय को घर के पास से ही उठाकर ले जाया गया और बेरहमी से पीटकर अधमरा कर दिया गया था, इस मामले में पुलिस ने भी आरोपी पक्ष का ही साथ दिया।
पुलिस करवाती उपचार तो बच सकती थी जान: विमला
मां विमला का आरोप है कि उनके बेटे अजय को करीब 25 लोगों ने बेरहमी से पीटा। पुलिस ने भी उसको पांच घंटे हवालात में रखा। अजय का उपचार नहीं कराया गया, इस दौरान उसकी हालत और बिगड़ती चली गई। कई दिन उपचार कराने के बाद भी हालत में सुधार नहीं आया और अजय की मौत हो गई। अगर समय पर उसे पुलिस हवालात में रखने के बजाय अस्पताल ले जाती तो शायद अजय की जान बच जाती।