दूसरी बार बसपा संसदीय दल के नेता चुने गए नगीना के सांसद गिरीश चंद्र जाटव ने कहा कि हर एक बूथ को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरा जाएगा और पार्टी को पहले की तरह ही मजबूती से खड़ा किया जाएगा। उन्होंने एमएलसी चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि इसका निर्णय बसपा सुप्रीमो को लेना है।
मुरादाबाद निवासी गिरीश चंद्र जाटव बिजनौर जनपद की नगीना लोकसभा सीट से सांसद हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मई 2019 में गिरीश चंद्र को बसपा संसदीय दल का नेता बनाया था, लेकिन अगले ही साल 2020 में मायावती ने उन्हें संसदीय दल के नेता पद से हटाकर मुख्य सचेतक बना दिया था। उनकी जगह सांसद रितेश पांडेय को संसदीय दल का नेता चुना था। अब फिर से रितेश पांडेय को हटा कर उनकी जगह सांसद गिरीश चंद को जिम्मेदारी दे दी है। गिरीश चंद्र ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है। उसे पूरी लगन और मेहनत से पूरा किया जाएगा। पार्टी की मजबूती पर काम किया जाएगा। इसके लिए बूथ स्तर पर काम करेंगे। इसके लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरा जाएगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में हुई हार की समीक्षा की जा रही है।
बसपा सांसद गिरीश चंद्र का राजनीति सफर
- (2000-2006) छह साल तक मुरादाबाद में बसपा के जिलाध्यक्ष रहे
- 2006-2007 बसपा में मुरादाबाद मंडल अध्यक्ष बनाए गए
- 2007 में चंदौसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधायक बने
-2012 में चंदौसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और हार गए
-2014 में नगीना से लोकसभा सीट पर चुनाव लड़े और हार गए
-2019 में नगीना लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और सांसद बने
-2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद संसदीय दल के नेता चुने गए
2020 में बसपा के मुख्य सचेतक चुने गए
2022 में दोबारा बसपा संसदीय दल के नेता चुने गए
प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार का बसपा में असर पड़ना शुरू हो गया है। लोकसभा सदस्यों के कार्यभार में बदलाव शुरू कर दिया गया है। इस कड़ी में पार्टी के अंबेडकरनगर के सांसद रितेश पांडेय को लोकसभा में पार्टी के नेता पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह नगीना के सांसद गिरीश चंद जाटव को जिम्मेदारी दी गई है। गिरीश पार्टी के चीफ व्हिप थे। उनकी जगह लालगंज सांसद संगीता आजाद को चीफ व्हिप बनाया गया है। वहीं, श्रावस्ती सांसद रामशिरोमणि वर्मा लोकसभा में उपनेता के पद पर बरकरार रहेंगे। मायावती ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को इस बाबत पत्र प्रेषित कर दिया है।
रितेश के पिता चुने गए हैं सपा से विधायक
दरअसल, रितेश को हटाने का अहम कारण है कि उनके पिता राकेश पांडेय सपा के टिकट पर अंबेडकर नगर की सीट जलालपुर से चुनाव लड़े और जीत गए। चुनाव से ऐन पहले वह बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए थे। इस जिले में बसपा पूरी तरह से धड़ाम हो गई। अंबेडकरनगर में राकेश पांडेय का कद काफी अहम है। विधानसभा चुनाव से पहले बड़े नेता लालजी वर्मा और राम अचल राजभर के बाद राकेश पांडेय का सपा में शामिल होना एक ही योजना का हिस्सा माना जा रहा है। इसी को लेकर मायावती रितेश से बेहद नाराज थीं।
लोकसभा अध्यक्ष ने की थी सख्त टिप्पणी
शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने रितेश पर सख्त टिप्पणी की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उनके एक सवाल का सवाल दे रही थीं। इस दौरान बीच में ही रितेश ने उन्हें टोक दिया था। इस पर ओम बिड़ला ने टोका और कहा कि मैंने आपको इजाजत नहीं दी। फिर आप बीच में कैसे बोल सकते हैं।