कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लॉक डाउन में दंपतियों के विवादों की बाढ़ सी आ गई। अनलॉक होते ही नारी उत्थान कें द्र में फाइलें पहुंचीं तो काउंसलरों का भी सिर चकरा गया। 500 फाइलें लंबित हैं और 500 से अधिक फाइलों को अभी तक काउंसलिंग के लिए कोई तारीख नहीं दी गई। जबकि, लॉकडाउन से पहले यहां हर रोज 30-35 दंपतियों की काउंसलिंग कराकर आपसी सुलह समझौते के आधार विवादों को निपटाया जाता था, लेकिन अब पांच या छह मामलों में ही काउंसलिंग हो पा रही है। अनलॉक के बाद नारी उत्थान केंद्र में काउंसलिंग का कार्य शुरू तो हो गया, लेकिन पटरी पर लौटने में अभी वक्त लेगा।
पुलिस लाइन स्थित नारी उत्थान केंद्र में दंपतियों से संबंधित विवादों को आपसी सुलह समझौतों के आधार पर सुलझाया जाता है। अधिकांश दंपती दो-चार काउंसलिंग के बाद एक साथ रहने को तैयार हो जाते हैं। लॉकडाउन से पहले तक नारी उत्थान केंद्र में विवादों को निपटाने का काम तेजी से चल रहा था। लॉकडाउन की वजह से नारी उत्थान केंद्र भी बंद कर दिया गया। अगस्त माह में जाकर नारी उत्थान केंद्र खोला गया, लेकिन अब 5- 6 मामलों में ही काउंसलिंग की जा रही है। परिवार के सदस्यों को भी दूर रखा जा रहा है।
146 दिन में में पंद्रह दिन खुला नारी उत्थान केंद्र
मुरादाबाद। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और इसके बाद 23 मार्च से लॉकडाउन लागू किया गया। 31 मई तक नारी उत्थान केंद्र बंद रखा गया। एक जून से कुछ शर्तों के साथ नारी उत्थान केंद्र में काउंसलिंग का कार्य शुरू किया। इसके बाद यहां तैनात पुलिस कर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए तो दोबारा नारी उत्थान केंद्र बंद कर दिया गया था। जून और जुलाई माह में भी दंपतियों की काउंसलिंग नहीं हो पाई। अगस्त माह से धीमी गति से काउंसलिंग की जा रही है।
मास्क के बिना एंट्री नहीं, दो- दो सदस्य ही साथ आ सकते हैं
मुरादाबाद। नारी उत्थान केंद्र की प्रभारी संध्या रावत ने बताया कि लॉकडाउन और कोरोना काल में केवल पंद्रह दिन ही काउंसलिंग हो पाई है। अब नारी उत्थान केंद्र में पति पत्नी अपने साथ केवल दो-दो सदस्यों को ही साथ लेकर आ सकते हैं। नारी उत्थान केंद्र में बिना मास्क के एंट्री नहीं दी जा रही है।
थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइज के बाद काउंसलिंग
मुरादाबाद। नारी उत्थान केंद्र में जिस दंपती की काउंसलिंग की जा रही है। उनकी पहले थर्मल स्क्रीनिंग की जाती है। इसके बाद उनके हाथों पर सैनिटाइज किया जाता है। जब जाकर उनकी काउंसलिंग होती है।
मेरी बेटी के साथ उसके पति और ससुराल वालों ने मारपीट की थी। इस संबंधित में एसएसपी कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया गया था। इस प्रार्थना पत्र को नारी उत्थान केंद्र भेज दिया गया था। नारी उत्थान केंद्र बंद होने की वजह से काउंसलिंग नहीं हो पाई थी। अब बेटी को लेकर लेकर आया हूं।
शखावत हुसैन, जटपुरा
मेरे बेटे की पत्नी ने शिकायती पत्र दिया था। इस मामले को लेकर काउंसलिंग चल रही है। बेटे को लेकर यहां आया हूं। बेटे की पत्नी ने एक माह पहले शिकायती पत्र दिया था।
जागन सिंह,
लॉक डाउन से पहले एक दिन में 30-35 फाइलों की काउंसलिंग की जाती थी, लेकिन अनलॉक के बाद नारी उत्थान केंद्र खुलने के बाद काफी बदलाव हो गया है। अब यहां एक दिन में 5 से 7 मामलों में ही काउंसलिंग की जा रही है। इसकी वजह से 500 से ज्यादा फाइलें लंबित हैं।
संध्या रावत, प्रभारी नारी उत्थान केंद्र, पुलिस लाइन मुरादाबाद