2.5 माह से पांच साल वाले बच्चों को दिक्कत
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शलभ अग्रवाल ने बताया कि ओपीडी में सबसे ज्यादा केस एलर्जी के हैं। कुछ बच्चों को भर्ती भी किया गया है। ढाई माह से पांच साल तक के बच्चे एलर्जी व निमोनिया से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोगों में भ्रांति है कि बच्चे को हर बार सर्दियों में निमोनिया हो जाता है।
जबकि यह बीमारी पूरे जीवन में एक या दो बार होती है। कई लोग एलर्जिक इनफेक्शन को निमोनिया समझ रहे हैं। अंतर समझने के लिए चेस्ट एक्स-रे कराना जरूरी हैै। इसके आधार पर उपचार दिया जाता है।
इनहेलर से घबरा रहे अभिभावक
जिला अस्पताल में एलर्जी से पीड़ित बच्चों को इनहेलर दिया जा रहा है। इससे कई अभिभावक घबरा रहे हैं। उनका कहना है कि इनहेलर बुजुर्गों व सांस के गंभीर मरीजों को दिया जा रहा है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि एलर्जी के इनफेक्शन के मामले में इनहेलर से अच्छी कोई दवा नहीं है। यह सीधे सांस की नली पर असर करती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार सिंह ने तीमारदारों को समझाया कि इनहेलर कुछ दिन के लिए है। सप्ताह भर में इसे बंद कर देंगे।
रात में छोटे बच्चों की साफ-सफाई करते समय ठंड से बचाने का ध्यान रखें। दिन में भी पंखा बिल्कुल न चलाएं। धूल व प्रदूषण के संपर्क में बच्चों को न आने दें। इससे अस्पताल जाने से बचे रहेंगे। - डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्साधीक्षक
छोटे बच्चे मास्क नहीं लगा सकते, इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी है कि उन्हें संक्रमण से बचाएं। बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं और खुद भी साफ सफाई का ध्यान रखें। बाहर से आने के बाद फौरन छोटे बच्चों को दो गोद में न लें। - डॉ. शलभ अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ