शासन की तरफ से सुविधाओं को बेहतर बनाने का दावा बेअसर साबित हो रहा है। ठंड शुरू होने के एक महीने बीत गए। सुबह और रात में धुंध छाया रहता है। बसों को दुरुस्त करने का काम कागजों में चल रहा है। जोन के 275 बसों में पार्किंग लाइट नहीं है। सबसे अधिक 58 लाइट पीतल नगरी और 45 लाइट मुरादाबाद की बसों में नहीं है। बसों के खराब होने व आपातकालीन स्थिति में खड़ा करते समय चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा जोन की 125 बसों में ऑल वेदर लाइट नहीं है। जिसमें मुरादाबाद डिपो की 32 और पीतलनगरी डिपो की 22 बसें शामिल हैं। हर एक बस में दो लाइट के हिसाब से अभी भी 250 लाइट लगानी बाकी है। इन असुविधाओं के चलते जहां यात्रियों का सफर मुश्किल है, वहीं हादसों का खतरा भी बना हुआ है। जिससे यात्रियों के साथ चालक और परिचालक भी परेशान हैं।
बसों के वाइपर और शीशे भी खराब
मुरादाबाद के दोनों डिपो की 22 बसों के शीशे टूटे हैं। बसों का वाइपर खराब है। यात्रियों को ठंड भरी रात में सफर करना पड़ता है। अधिकांश बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं है। यात्रियों के साथ चालक और परिचालक भी परेशान हैं। चालकों और परिचालकों का कहना है कि रास्ते में बस के खराब हो जाने पर वह खुद बस को बनाते हैं। बसों के बनवाने पर मिली रसीद को डिपो कार्यालय में जमा करने के बाद अधिकतर रसीद के पैसे भी नहीं मिलते हैं।
मुरादाबाद जोन की सभी बस की जांच कराई जाएगी। जिन बसों में कोई भी कमी है, उसे जल्द-जल्द सही करा दिया जाएगा। - परवेज खान, आरएम मुरादाबाद रीजन