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मुरादाबाद का सुल्ताना: 17 साल की उम्र में बना डाकू, सरकारी खजाने को बनाता था निशाना; यहां रहते हैं वंशज

Wed, 10 Jul 2024 02:20 PM IST
शाहरुख खान जितेंद्र कुमार, अमर उजाला, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद के सुल्ताना को 100 साल पहले सात जुलाई 1924 को फांसी दी गई थी। मुरादाबाद की आदर्श कॉलोनी में सुल्ताना के वंशज रहते हैं। सुल्ताना डाकू को आदर्श कॉलोनी के लोग हीरो मानते हैं।
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Moradabad Sultana - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम करने वाले सुल्ताना डाकू का जन्म मुरादाबाद की आदर्श कॉलोनी  में हुआ था। उनके वंशज आज भी इसी कॉलोनी में रहते हैं। वे सुल्ताना को अपना आदर्श मानने के साथ उनकी पूजा भी करते हैं। इन परिवारों का कहना है कि सुल्ताना डाकू नहीं, गरीबों और मजलूमों के असली हीरो थे। 
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100 साल पहले सात जुलाई 1924 को अंग्रेजी सरकार ने सुल्ताना डाकू को फांसी दी गई थी। आदर्श कॉलोनी निवासी सुल्ताना महज 17 साल की उम्र में डाकू बन गया था। अंग्रेजों से सुल्ताना की दुश्मनी थी। वह बचपन से ही अंग्रेजों को पसंद नहीं करता करता था। 

गरीबों और मजलूमों से उसे गहरा लगाव था। आदर्श कॉलोनी में रहने वाले सुल्ताना के रिश्तेदार कमल सिंह का कहना है कि सुल्ताना डाकू नहीं थे। मैंने अपने पूर्वजों से सुल्ताना की तमाम कहानियां सुनी हैं। अंग्रेजी फौज हिंदुस्तानियों से लूटपाट करती थी, लेकिन सुल्ताना अंग्रेजों के खजाने से माल लूटकर गरीबों में बांटते थे। 


 

आदर्श कॉलोनी में सुल्ताना के परपोते राजन, दुर्याेधन, संजय और विकट सिंह के परिवार रहते हैं। इन चारों परपोतों की मृत्यु हो चुकी है। राजन सिंह की पत्नी सरिता सिंह और उनका परिवार रहता है। सरिता सिंह परचून की दुकान चलाकर परिवार का पालन पोषण करती हैं, जबकि अन्य परपोतों के परिवार भी आदर्श कॉलोनी में अलग-अलग रहते हैं।

 

परपोते की पत्नी लड़ चुकी हैं चुनाव
सुल्ताना के कोई औलाद नहीं थी, लेकिन उनके भाई के बेटे और पोते, परपोते आदर्श कॉलोनी में ही रहते हैं। कुछ परिवार मुंबई चले गए। राजन सिंह की पत्नी सरिता सिंह ने आदर्श कॉलोनी में सभासद का चुना लड़ा था, लेकिन वह हार गई थीं।

 

मेरे दादा और फूफा थे सुल्ताना गिरोह के सदस्य
आदर्श कॉलोनी में रहने वाले कमल सिंह ने बताया कि मेरे दादा और फूफा भी सुल्ताना की गिरोह में शामिल थे। दादा को 30 साल और फूफा को 35 साल की सजा हुई थी। सुल्ताना ने गरीबों की बेटियों की शादियां कराई थीं। इस कारण वह गरीबों के मसीहा बन गए थे।

 

इस तरह हुई थी सुल्ताना की गिरफ्तारी
सुल्ताना के रिश्तेदार कमल सिंह ने बताया कि सुल्ताना अंग्रेजों के हाथ नहीं आ रहे थे। अंग्रेजी हुकूमत ने फ्रेडी नाम की महिला अफसर को गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। 14 दिसंबर 1923 को फ्रेडी को सूचना मिली थी कि सुल्ताना हरिद्वार के किसी गांव में डकैती डालकर अपने ठिकाने पर पहुंचा है। 

 

फ्रेडी ने 300 सैनिकों के साथ मिलकर सुल्ताना और उसके गिरोह के सदस्यों को चारों ओर से घेर लिया था। 23 जून 1923 को सुल्ताना डाकू को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद सुल्ताना और उसके चार साथियों को सात जुलाई 1924 को आगरा में फांसी दी गई थी और गैंग के 40 अन्य लोगों को काला पानी की सजा हुई थी।

 

मालगाड़ी से कोयला टूटने से अपराध की शुरुआत
भांतू कॉलोनी में कच्ची शराब बनाने का इतिहास पुराना है। भांतू कॉलोनी के बराबर से रेल लाइन गुजर रहती है। उस जमाने में भी कोयला लेकर मालगाड़ियां गुजरती थीं। भांतू कॉलोनी के लोग शराब बनाने के लिए मालगाड़ी से कोयला लूटते थे। तब सुल्ताना भी इन लोगों के साथ कोयला लूटने के लिए जाता था। यहीं से सुल्ताना ने अपराध की दुनिया में कदम रखना शुरू कर दिया था।

 

कब्रिस्तान में है सुल्ताना की समाधि
सिविल लाइंस की आदर्श कॉलोनी में भातुओं का कब्रिस्तान है। इस कब्रिस्तान में सुल्ताना डाकू की समाधि बनी है। जिस पर आदर्श कॉलोनी के तमाम लोग सुबह-शाम पहुंचते हैं। इसके अलावा सुल्ताना के वंशजों ने अपने घर में सुल्ताना की फोटो आज भी लगा रखी है। ये लोग सुल्ताना की पूजा करते हैं।

 

चार परिवार रहते हैं आदर्श कॉलोनी में, 100 साल से जला रहे दीया
आदर्श कॉलोनी में सुल्ताना के पोते विकट सिंह का परिवार रहता था। विकट सिंह के चार बेटे संजय सिंह, राजन सिंह, दुर्याेधन सिंह और वीरेंद्र सिंह थे। वीरेंद्र सिंह मुंबई में रहते हैं, जबकि राजन, संजय और दुर्योंधन की मृत्यु हो चुकी है। चारों के परिवार आदर्श कॉलोनी में रहते हैं। 
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राजन की पत्नी सरिता और संजय की पत्नी आरती ने बताया कि मंदिर में सुल्ताना की फोटो है। हमारा परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी सुल्ताना की पूजा करता आ रहा है। पिछले 100 साल से फोटो पर रोज दीया जलाया जाता है। सरिता सिंह ने बताया कि हमारे पूर्वजों का नजीबाबाद में किला है, लेकिन हमारे परिवार को आज तक नहीं मिला है।
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