मुरादाबाद। रूसी हमले के बाद यूक्रेन में हालात विकट हो गए हैं। मुरादाबाद जिले के एमबीबीएस के सात विद्यार्थी सहित 11 लोगों के यूक्रेन में फंसे होने के कारण उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। इन परिवारों के सदस्य हर पल टीवी पर नजरें गड़ाए हुए हैं या फोन पर बातचीत कर अपनों के हाल-चाल बारे में जानकारी लेते रहे। निमिष सक्सेना ने बताया कि यूक्रेन के समयानुसार सुबह 8.30 बजे वीन्नित्स्या के मिलिट्री बेस पर मिसाइल से हमले के बाद धमाके से उनकी नींद खुली। हमले की जानकारी मिलने के बाद वह राशन लेने गए, तो दुकानों पर राशन नहीं मिला।वहीं, परिवार के सदस्यों ने बच्चों की सलामती की दुआएं कीं। परिजन उनके जल्द घर वापसी की प्रतीक्षा भी कर रहे हैं।
मुरादाबाद जिले के यूक्रेन में एमबीबीएस के सात विद्यार्थी सहित 11 लोग फंसे हैं। टर्नोपिल में एमबीबीएस के छात्र देहरी गांव निवासी सजल सरकार, चक्कर की मिलक निवासी अमान, वीन्नित्स्या में अवंतिका कॉलोनी निमिष सक्सेना रहते हैं। भोजपुर निवासी जियाउद्दीन ने बताया कि उनका भाई शहाबुद्दीन भी वीन्नित्स्या में एमबीबीएस का चतुर्थ वर्ष का छात्र हैं। उसने बताया कि कुछ विद्यार्थियों की टिकट भी बुक हैं, लेकिन अभी भारत वापसी पर संकट के बादल छाए हैं। परिजन उनके सलामती और जल्द घर वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अवंतिका कॉलोनी निवासी निमिष सक्सेना ने फोन पर बताया कि यूक्रेन के समयानुसार सुबह 8.30 बजे वीन्नित्स्या के मिलिट्री बेस पर मिसाइल से हमला हुआ। धमाके से उनकी नींद खुली। हमले की जानकारी मिलने के बाद वह राशन लेने गए, तो दुकानों पर राशन नहीं मिला। मॉल से 15 दिन का राशन खरीदा। यातायात सेवा बंद होने के कारण चार किलोमीटर पैदल सामान लेकर छात्रावास पहुंचे। एटीएम पर लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं। निमिष ने बताया कि मुरादाबाद मंडल के करीब सौ विद्यार्थी उनके विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं। आगे क्या होगा, अब कोई जानकारी नहीं है। निमिष के अनुसार उनका हाल जानने के लिए परिजनों और रिश्तेदारों के लगातार फोन आ रहे हैं।
भोजपुर पीपलसाना निवासी शहाबुद्दीन ने बताया कि वह एमबीबीएस का चतुर्थ वर्ष का छात्र है। 25 जनवरी को वह यूक्रेन गया था। वापसी की टिकट कराई है, जो कि नौ मार्च की है। भारतीय दूतावास से उनके पास छात्रावास से बाहर नहीं निकलने का मेल आया है। उन्होंने बताया कि राशन व अन्य सामान खरीद लिया है और सभी छात्र एकसाथ हैं। छात्रावास की स्थिति सामान्य है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था नहीं की थी। इसलिए वह टिकट बुक नहीं करा पाए थे।
हर आधा घंटे पर फोन कर ले रहे हालचाल
मुरादाबाद/पाकबड़ा। चक्कर की मिलक निवासी अमान के पिता अतीक अहमद और गांव देहरी निवासी सजल सरकार के पिता सत्यरंजन सरकार ने बताया कि उनके बच्चे टर्नोपिल में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं। वह लगातार अपने बच्चों के संपर्क में हैं। बच्चे छात्रावास में रह रहे हैं और खाने की व्यवस्था कैंटीन में है। इसके बावजूद आपात स्थिति के लिए बच्चों को चावल, आटा, दाल, नमकीन, बिस्किट खरीदने को बोल दिया है, ताकि हालात खराब होने पर यदि कैंटीन में खाना नहीं मिल पाए तो उन्हें कोई परेशानी न हो।
भारतीय दूतावास को भी बच्चों को वहां से निकालने के लिए ईमेल किया है। टिकट बुक करवाने का प्रयास किया है, लेकिन बुकिंग नहीं हो पा रही है। हर आधे घंटे पर फोन कर वहां के हालातों की जानकारी ले रहे हैं। ईश्वर से बच्चों की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उम्मीद है कि वह बच्चों को सकुशल वापस बुलवाएं। मंगूपुरा निवासी मोहम्मद अरहम पुत्र शाकिर हुसैन टर्नोपिल से एमबीबीएस में पढ़ाई कर रहा है। 22 जनवरी को परीक्षा थी, इसलिए रुक गया था। पिता शाकिर हुसैन दिल्ली गए हुए हैं, ताकि अधिकारियों से मुलाकात कर टिकट बुक हो सके। घर पर अन्य सभी परिजन चिंतित हो रहे हैं। मां शबनम, बड़ा भाई मोहम्मद सोहेब और बहन अनम अपने भाई अरहम की सलामती की दुआएं कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को दिनभर उनके घर में खाना भी नहीं बना है।
तीन गुना किराया देने के बाद भी फंसे हैं बच्चे
मुरादाबाद। अवंतिका कॉलोनी निवासी प्रदीप सक्सेना ने बताया कि उनके बेटे निमिष सक्सेना की 27 फरवरी की टिकट बुक है। भारत सरकार क्या कर रही है, कुछ पता नहीं है। फ्लाइट का किराया लगातार महंगा होता जा रहा है। पहले रूस ने बॉर्डर से टैंक वापस बुला लिए थे और कॉलेज कक्षाओं को ऑनलाइन नहीं कर रहा था। इस वजह से पहले टिकट बुक नहीं कर पाए। 25 हजार रुपये किराये की जगह 65 हजार रुपये टिकट बुकिंग में खर्च हुए हैं। एंबेसी ने फार्म भरवा लिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार तीन गुने दामों पर फ्लाइट भेजी थी, इसके बावजूद बच्चे वहां फंसे हुए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि हालात ठीक होंगे तो दोबारा भेज देंगे, लेकिन अभी बच्चों को सकुशल बुलाया जाए।
जब तक बेटा घर नहीं आ जाता, नहीं मिलेगा सुकून
पाकबड़ा। पाकबड़ा के नगला नीडर गांव निवासी बाबू आलम ठेकेदारी करते है। बाबू आलम का बड़ा बेटा मोहम्मद फैज यूक्रेन के टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है। इस समय मोहम्मद फैज जीवोवा हॉस्टल में है। मोहम्मद फैज ने वीडियो कॉल पर बात करते हुए बताया कि सुबह के समय विश्वविद्यालय के निदेशक ने हॉस्टल आकर बताया कि सभी विद्यार्थी छात्रावास में रह रहे हैं। कोई भी बाहर नहीं निकले। सभी विद्यार्थी इस समय ऑनलाइन क्लास करेंगे। स्थानीय और बाहरी लोगों ने 10 से 15 दिन का राशन लेकर अपने अपने घरों में रख लिया है। क्योंकि लगातार हालात बिगड़ने की आशंका है। देश पर अब साइबर अटैक का खतरा बना हुआ है। बाबू आलम ने बताया कि 28 फरवरी का फैज का टिकट है, लेकिन यूक्रेन के हालात बिगड़ रहे हैं। बस अल्लाह से दुआ कर रहे हैं कि सही सलामत मेरे बेटे के साथ अन्य लोग भी सुरक्षित अपने घर आ जाएं। दिन में कई-कई बार वीडियो कॉल करके हाल चाल ले रहे हैं।
यूक्रेन में में एटीएम और पेट्रोल पंपों पर लगी कतार
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। थाना मझोला के गांव ज्ञानपुर के मूल निवासी यूक्रेन के दिनीप्रो शहर में रह रहे विजयपाल सिंह का कहना है कि भारतीय समय के मुताबिक सुबह 7.30 आर्मी बेस पर हमला हुआ था। हमले के बाद से अफरातफरी बढ़ गई है। राशन की दुकानें, एटीएम और पेट्रोल पंप पर लाइनें लग गई हैं। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1991 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गए थे. तब से वहीं पर रह रहे हैं। पिछले वर्ष वह भारत आए थे और दिसंबर के आखिरी सप्ताह में ही यूक्रेन गए थे। परिवार में उनके साथ उनकी पत्नी वीता और दो बेटे अजय और विवेक हैं, जबकि बेटी रानी जर्मनी से परास्नातक की पढ़ाई कर रही है। बड़ा बेटा अजय कीव में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। हमला होने से पहले वह भी दिनीप्रो पहुंच गया है। छोटा बेटा विवेक तीसरी कक्षा में है। उन्होंने बताया कि अभी फ्लाइट में बुकिंग नहीं हो पा रही है। 22 फरवरी को भारतीय फ्लाइट गई थी। 24 और 26 को भी फ्लाइट थी, लेकिन अब वह निरस्त हो गई हैं। उन्होंने बताया कि राशन व अन्य सामान ले लिया है।