सुनवाई के दौरान चार अभियुक्तों की हो चुकी है मौत
मूंढापांडे थाने में वादी यशपाल सिंह की तहरीर बारह लोगों के खिलाफ हत्या, जान लेवा हमला, बलवा समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मुकदमे की दौरान आरोपी ताहर सिंह, रतिराम, महावीर और चंद्रपाल की मौत हो चुकी है। वहीं, हत्याकांड में आरोपी रहे गिरीश पाल, महेश, दिनेश, प्रेमपाल, और हरिओम के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें दोष मुक्त किया गया।
केस के वादी यशपाल को भी हो चुकी उम्रकैद की सजा
2006 में यशपाल के ताऊ बदन सिंह और भाई गिरिराज सिंह की हत्या की गई थी। इस हत्याकांड के तीन साल बाद दूसरे पक्ष के महावीर सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में यशपाल सिंह, महेंद्र, ओमपाल, मुलायम सिंह, जमुना प्रसाद व शीशपाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत ने महावीर सिंह की हत्या में महेंद्र, ओमपाल और यशपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जबकि बाकी तीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। यशपाल और ओमपाल आगरा की जेल में बंद हैं, जबकि महेंद्र बरेली में जेल में बंद है।
55 पेज का आदेश, मुकदमे में 16 गवाह ने दिए बयान
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार कश्यप ने बताया कि इस मुकदमे में सोलह लोगों ने अदालत में आकर अपने बयान अंकित कराए। जिसमें गवाह ओमवती के साथ अन्य मौके पर मौजूद गवाहों ने अपनी गवाही दी जबकि इन्हीं गवाह मे से पांच गवाहों ने गिरीशपाल, महेश,दिनेश हरिओम और प्रेम पाल के खिलाफ गवाही नहीं दी। जिन्हें पूरे मामले में निर्दोष माना गया । जिसके बाद अदालत ने मामले के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए अपना 55 पेज का फैसला सुनाया। जिसमें तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और चार आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया ।
विवादित जमीन के अभिलेखों से भी साफ नहीं हुआ जमीन किसकी
जिस जमीन को हासिल करने के लिए दो लोगों का मर्डर हुआ। वो जमीन किसकी थी इस बात की पुष्टि हल्का लेखपाल भी नहीं कर पाया। अदालत ने ग्राम के लेखपाल को इस बात की पुष्टि के लिए तलब किया था कि विवादित जमीन के अभिलेखों मे किसका नाम दर्ज है, लेकिन लेखपाल भी इस बात का सही जवाब देने में असमर्थ रहा।