बालिका गृह में मौजूद इन मुन्नियों को भी किसी बजरंगी भाईजान की तलाश है। अपने घर का पता इन्हें नहीं मालूम। किसी को पिता का नाम भी नहीं पता। वह सिर्फ अपना जिला जानती हैं। काफी दिनों से बालिका गृह मुरादाबाद में रह रही हैं।
इन बेटियों के घर परिवार की तलाश में बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, बालिका गृह प्रशासन फिलहाल फेल रहा है। अब कोशिश यह है कि इन बेटियों को उनके गृह जनपद अथवा उसके समीप वाले बालिका गृहों तक पहुंचा दिया जाए ताकि वहां से उनके परिवार की तलाश तेज हो सके।
शुक्रवार को नारी निकेतन में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की मीटिंग में इन बेटियों को उनके गृह जिलों अथवा समीप वाले जिलों के बालिका गृहों में भेजने का फैसला हुआ। इनमें एक बच्ची मेरठ, एक सहारनपुर, एक इलाहाबाद की है। एक लड़की बांग्लादेश और एक अन्य नेपाल की निवासी है। बांग्लादेशी लड़की को कानपुर बालिका गृह भेजा जाएगा।
यह हैं बच्चियां
- इल्मा पुत्री शहजाद 10 वर्ष, 7 जून 2015 से नारी निकेतन मुरादाबाद में, पता नहीं बता पा रही, जिला मेरठ बताया है, बालिका गृह सहारनपुर भेजा जा रहा है
- छोटी पिता अज्ञात 10 वर्ष, 26 फरवरी 2016 से नारी निकेतन मुरादाबाद में, जिला सीतापुर बताती है, लखनऊ बालिका गृह भेजा जाएगा
- इशिका पुत्री संतोष पांडे, 15 वर्ष, कराव इलाहाबाद, घरेलू प्रताड़ना से घर छोड़ दिया था, इलाहाबाद बालिका गृह भेजा जाएगा
- सलीमा 14 वर्ष, बांग्लादेश निवासी, मां बांग्लादेश में रिफ्यूजी कैंप में, नवंबर 2015 में अमरोहा से नारी निकेतन मुरादाबाद में भेजा गया था, मां से नारी निकेतन अधीक्षिका की वार्ता हुई, वह इंडिया आ नहीं पा रही, गरीब परिवार, दिल्ली में बांग्लादेशी दूतावास से संपर्क करने पर दूतावास ने म्यांमार नागरिक बता झाड़ा पल्ला, कानपुर बालिका गृह भेजा जाएगा
कोशिश है कि इन बच्चियों को जल्द उनका परिवार मिले। उनके बताए गए जिलों अथवा पास के जिलों के बालिका गृहों में भेजा जा रहा है। वहां से परिवार की खोजबीन आसान हो सकेगी। बांग्लादेश और नेपाली मूल की बच्चियों को उनके घर पहुंचाने के लिए दोनों देशों के दूतावासों को पत्र लिखा जाएगा।
- डा. विशेष गुप्ता, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति मुरादाबाद