बिलारी। रुस्तमनगर सहसपुर गांव में लगने वाले ऐतिहासिक दशहरा मेला का लगभग 251 साल पुराना इतिहास है। सहसपुर राज परिवार की ओर से लगवाए जाने वाले इस दशहरा मेला को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एकता और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 22 अक्तूबर को दशहरा मेला और उसी दिन शाम को रावण दहन होगा। मेला स्थल दुकानें और झूले लगने शुरू हो गए हैं।
सहसपुर गांव के लोगों के अनुसार वर्ष 1775 से सहसपुर राज परिवार की ओर से सहसपुर गांव में इस दशहरा मेला का आयोजन कराया जा रहा है। पूर्व में अनेक वर्षों तक प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहीं सहसपुर राजपरिवार की दिवंगत रानी इंद्रमोहिनी द्वारा इस मेले का आयोजन कराया जाता था। अब लंबे समय दिवंगत रानी इंद्रमोहिनी की बेटी और प्रदेश सरकार की पूर्व मंत्री रानी रीना कुमारी की ओर से इस दशहरा मेले का सफल आयोजन कराया जा रहा है।
मेले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से अनेक जातिवर्गों के लोग पहुंचते हैं इसीलिए यह मेला आपसी एकता, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। मेले के मौके पर मेहमानों की आवभगत के लिए सहसपुर गांव के हर घर में तैयारी चल रही है। इस वर्ष 22 अक्तूबर को दोपहर बाद सहसपुर राजमहल में अतिथियों के सम्मान में विशेष समारोह होगा।
मेला आयोजक प्रदेश की पूर्व मंत्री रानी रीना कुमारी ने रविवार दोपहर बाद सहसपुर राजमहल पहुंचकर दशहरा मेला की तैयारियों की जानकारी ली और मेला कमेटी सदस्यों को जरूरी निर्देश भी दिए। इस दौरान रानी रीना कुमारी के बेटे दिग्विजय सिंह उर्फ बाबा राजा, मेला कमेटी के प्रदीप शर्मा और संजू गुप्ता आदि भी मौजूद रहे।
रानी रीना कुमारी ने बताया कि उनके राजपरिवार के बुजुर्गों ने इस दशहरा मेला की शुरुआत कराई थी तभी से लगातार दशहरा मेला का आयोजन जारी है। पूर्व के जमाने में मनोरंजन के साधन कम थे। मेला देखने देहात इलाकों से महिलाएं बैलगाड़ी में बैठकर गीत गाते हुए आती थीं। उनके अनुसार सभी वर्गों के लोगों के इस मेले में प्रतिभाग करने की वजह से सहसपुर का यह प्राचीन ऐतिहासिक दशहरा मेला आपसी एकता और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।