मुरादाबाद। जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के शामिल होने और सत्ता पक्ष के विधायकों के न पहुंचने पर हुई चर्चाओं ने सर्द मौसम में भी सियासी पारा चढ़ा दिया। इस बैठक से दूर रहे विधायक रामवीर सिंह ने जिला पंचायत में कमीशन के खेल का आरोप लगा दिया। कहा कि उन्हें बोर्ड बैठक की सूचना नहीं दी गई। एजेंडा भी नहीं भेजा। यदि सूचना मिलती तो उनकी पत्नी संतोष देवी जिला पंचायत सदस्य होने के नाते बैठक में जरूर जातीं। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष शैफाली सिंह ने भाजपा विधायकों के न आने के पीछे लखनऊ में पार्टी बैठक में व्यस्तता का हवाला दिया है। साथ ही सभी को एजेंडा भेजने की बात कही है।
जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में सपा के विधायक कमाल अख्तर (कांठ), नासिर कुरैशी (देहात), मो. फहीम (बिलारी) पहुंचे। भाजपा से नगर विधायक रितेश गुप्ता, कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह के अलावा एमएलसी डाॅ. जयपाल सिंह व्यस्त, गोपाल अंजान, सत्यपाल सैनी बैठक में नहीं शामिल हुए। इस बाबत सवाल उठने पर जिला पंचायत अध्यक्ष डाॅ. शैफाली सिंह ने बताया कि ये जनप्रतिनिधि लखनऊ में भाजपा की बैठक में व्यस्त थे।
इस बीच कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह ने शैफाली सिंह के इस कथन को अपने अलग बयान से चुनौती दे दी। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि न तो मुझे जिला पंचायत बोर्ड बैठक की सूचना दी गई और न ही बैठक का एजेंडा भेजा गया। मेरी पत्नी को भी सूचना नहीं भेजी गई, जबकि वह जिला पंचायत की सदस्य हैं। यदि सूचना मिलती तो मेरी पत्नी बैठक में जातीं।
दूसरी ओर, जिला पंचायत अध्यक्ष डाॅ. शैफाली सिंह ने कहा कि उनके कार्यालय से सभी जनप्रतिनिधियों को सूचना भेजी गई थी। सूचना न देने का आरोप पूरी तरह से निराधार है।
भाजपा के दो दिग्गजों (रामवीर सिंह व शैफाली सिंह) के एक-दूसरे को केंद्र में रखकर दिए जा रहे बयानों ने जहां सियासी गर्माहट बढ़ा दी है, वहीं इन स्थितियों से यह भी साफ हो गया है कि भाजपाइयों की आपसी रार थम नहीं रही है। पिछले वर्ष जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में रामवीर सिंह मौजूद रहे थे। अधिकारियों की अनुपस्थिति और विकास कार्यों से जुड़ा मुद्दा उठाने पर बैठक की अध्यक्षता कर रहीं शैफाली सिंह से उनकी तकरार हो गई थी। पूर्व में कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के टिकट के समय भी दोनों के बीच खींचतान देखने को मिली थी।
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चार कंपनियों को ही दिया गया ठेका : कुंदरकी विधायक
मुरादाबाद। कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह का आरोप है कि जिला पंचायत में कमीशन का खेल चल रहा है। चार खास कंपनियों को ठेका दिया जाता है। एक कंपनी को 70 फीसदी तक काम का ठेका दिया गया है। पांच साल की स्थिति जांची जाए तो एक भी पुरानी सड़क की मरम्मत नहीं की गई है। हर बार नई सड़कें बनाने पर जोर रहता है। इस गड़बड़ी के लिए जिला पंचायत के अभियंता और अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) जिम्मेदार हैं।