मुरादाबाद। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं की शुरुआत 24 मार्च को हुई थी और चार अप्रैल तक दस दिन परीक्षाएं हुई हैं, लेकिन शिक्षा विभाग एक भी नकचली नहीं पकड़ पाया था। बलिया में अंग्रेजी के पेपर के लीक होने के बाद शिक्षा अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे थे, लेकिन ठाकुरद्वारा में डीआईओएस व प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई की तो एक साथ 26 लोगों के पकड़े जाने बाद से अब तक की प्रक्रिया सवालिया घेरे में आ गई है।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं का शुभारंभ 24 मार्च को हुआ था। 30 मार्च को बलिया में इंटरमीडिएट का अंग्रेजी विषय का पेपर लीक होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी मुरादाबाद जनपद में पूर्ण सुचिता और पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं आयोजित होने के दावे कर रहे थे। उनका कहना था कि बोर्ड की परीक्षाओं की निगरानी सभी परीक्षा कक्षों में दो-दो सीसीटीवी, वॉयस रिकॉर्डर के माध्यम से की जा रही है। उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों को रखने के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम में सीसीटीवी, डबल लॉक की अलमारी, जो केंद्र व्यवस्थापक और स्टेटिक मजिस्ट्रेट के पास उपलब्ध चाबी से खुलती है की व्यवस्था की गई है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां पर बलिया की घटना के बाद दिन में दो पालियों के अलावा रात के समय भी निगरानी के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। बोर्ड के निर्देश पर जनपद स्तर पर छह सचल दल बनाए गए हैं। चार सचल दल के प्रभारी राजकीय हाईस्कूल कुचावली के प्रधानाचार्य शाने आलम, राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य श्यामा कुमार, राजकीय हाईस्कूल हाथीपुर चित्तू के प्रधानाचार्य डॉ. यतेंद्र पाल सिंह, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज मूंढाखेड़ी की प्रधानाचार्य प्रतिभा गुप्ता हैं, जबकि दो सचल दल के प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बुद्धप्रिय सिंह और जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरुण कुमार दुबे स्वयं हैं।
प्रत्येक सचलदल में चार सदस्य, एक प्रभारी और दो पुलिसकर्मी शामिल हैं। स्टेटिक मजिस्ट्रेट, सेक्टर मजिस्ट्रेट के अलावा हर ब्लॉक के नौ नोडल अधिकारी बनाए हुए हैं। इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों को एक भी नकलची पकड़ में नहीं आया था।
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में थे डीआईओएस
सुबह आठ बजे अंग्रेेजी विषय की परीक्षा शुरू हुई थी। बताया जाता है कि सुबह की पाली की निगरानी के लिए डीआईओएस का सचलदल ठाकुरद्वारा क्षेत्र में ही था। इसी बीच एक महिला ने सुबह साढ़े आठ बजे जिलाधिकारी के अलावा डीआईओएस को भी फोन किया था। इस पर वह साढ़े नौ बजे महाविद्यालय पहुंचे, जहां एक कमरे में उन्हें 26 व्यक्ति मिले, जिसमें से 15 व्यक्ति उत्तर पुस्तिकाओं को लिख रहे थे।