मुरादाबाद। अपराध के बदलते तौर-तरीकों और नए कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस महकमे ने ट्रेनिंग व्यवस्था में बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब दरोगा और सिपाहियों के नए बैच को ट्रेनिंग देने के लिए पुलिस अकादमी ट्रेनर तैयार करेगी। ट्रेनर बनने के इच्छुक पुलिस कर्मियों की विभागीय स्तर पर परीक्षा आयोजित की जाएगी। जिसे पास करने वाले पुलिसकर्मियों को ही ट्रेनर बनने का मौका मिलेगा।
साइबर अपराध और तकनीक आधारित वारदातों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में परंपरागत ट्रेनिंग से आगे बढ़कर आधुनिक, तकनीक-आधारित और कानून-केंद्रित प्रशिक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है। यूपी पुलिस में करीब 60 हजार सिपाहियों की ट्रेनिंग अंतिम दौर में चल रही है। अगले माह यह सभी पुलिस कर्मी पास आउट होकर अलग अलग जिलों में तैनात हो जाएंगे। इसके बाद यूपी पुलिस में दरोगा की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद सिपाहियों की भर्ती की प्रक्रिया होगी। दरोगा और सिपाहियों के नए बैच से पहले पुलिस महकमे ने ट्रेनरों को ट्रेंड करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह ट्रेनर बदलते अपराध के तौर तरीके और नए कानून के साथ ही साबबर अपराध, एआई समेत तकनीक के तौर पर मजबूत होंगे। विभागीय परीक्षा पास करने वाले पुलिस कर्मियों को ही ट्रेनर बनाया जाएगा
गुणवत्ता पर रहेगा विशेष फोकस
मुरादाबाद। ट्रेनर दक्ष होंगे तो आने वाली पीढ़ी के पुलिसकर्मी भी अधिक सक्षम और पेशेवर बनेंगे। पुलिसिंग अब सिर्फ गश्त और जांच तक सीमित नहीं है। डिजिटल के इस दौर में अपराध भी हाईटेक हो चुका है। ट्रेनर हाईटेक और कानून की गहरी समझ रखने वाले होने चाहिए।
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पुलिस कर्मियों की ट्रेनिंग को हर स्तर पर बेहतर किया जा रहा है। ट्रेनर दक्ष होंगे तो उनके द्वारा तैयार किए जाने वाले पुलिस कर्मी मजबूत होंगे। चयनित ट्रेनर को ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाएगा।
राजीव सभरवाल, डीजी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश पुलिस