मुरादाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासकों के कार्यकाल में की गई वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किए गए दो ग्राम पंचायत सचिवों की दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया है। अधिकारी को नियमानुसार नया आदेश पारित करने को कहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद दोनों पंचायत सचिवों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर अपर मुख्य सचिव पंचायती राज द्वारा गठित विशेष जांच समिति की जांच आख्या के आधार पर जनपद मुरादाबाद में प्रशासकों के कार्यकाल में खर्च की गई धनराशि में तमाम वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में ब्लॉक मूढ़ापांडे और कुंदरकी के नौ ग्राम पंचायत सचिव, दो सहायक विकास अधिकारी पंचायत और तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी को निलंबित किया गया था। ग्राम पंचायत अधिकारियों को निलंबित करने से पूर्व जिला पंचायतराज अधिकारी ने शासनादेश के अनुसार जिलाधिकारी का अनुमोदन प्राप्त नहीं किया था।
इस पर ग्राम पंचायत अधिकारी इंतजार हुसैन और मोहन सिंह रावत ने अपने निलंबन आदेश को विधि विरुद्ध बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को दोनों की अलग.अलग याचिकाओं को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने डीपीआरओ द्वारा किए गए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही डीपीआरओ को दुबारा विधि अनुसार नया आदेश पारित करने की भी स्वतंत्रता दी है।