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UP: मुरादाबाद मंडल में मजबूत रही सपा-बसपा व रालोद गठबंधन की गांठ, 2019 में कांग्रेस-बीजेपी को नहीं मिली सीट

Mon, 15 Apr 2024 04:50 PM IST
विमल शर्मा समीउद्दीन नीलू, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद मंडल में गठबंधन की गांठ 2019 में सबसे मजबूत रही। इस चुनाव में गठबंधन ने मंडल की सभी सीटों पर विजयी पाई थी। भाजपा और कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली।   
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लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सियासी समर में एक दूसरे दल को मात देने के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा सिर्फ इस लोकसभा चुनाव में ही आपसी गठबंधन नहीं किया गया है, इससे पहले भी विभिन्न राजनीतिक दल चुनावी अखाड़े में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए आपस में गठबंधन कर चुके हैं।

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लेकिन पिछले अगर चार लोकसभा चुनावों पर नजर डाले तो वर्ष 2019 में सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन की गांठ सबसे मजबूत साबित हुई है। इस गठबंधन ने वर्ष 2014 की मोदी लहर में भाजपा को मिली न सिर्फ सभी छह सीटें उससे छीन ली थी बल्कि सभी सीटों पर आधे से अधिक मतदाताओं का साथ पाने की मिसाल भी पेश की है।

 

मंडल में 2009 से पहले थीं पांच लोकसभा सीटें
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव सपा व रालोद ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। तब मंडल में पांच लोकसभा सीटें हुआ करती थीं। 2009 में बिजनौर जिले की नगीना लोकसभा सीट बनी और उस पर पहली बार चुनाव हुआ। जबकि पांच अन्य लोकसभा सीटें मुरादाबाद, रामपुर, संभल, अमरोहा, बिजनौर पहले से ही अस्तित्व में थीं।
 

2004 : गठबंधन के चार प्रत्याशी जीते, वोट 47 फीसदी तक ही मिला 
वर्ष 2004 का लोसभा चुनाव सपा और रालोद ने मिलकर लड़ा था। इस चुनाव में मंडल की पांच लोकसभा सीटों में से चार मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर और संभल सीट पर गठबंधन को जीत मिली। मुरादाबाद सीट पर सपा प्रत्याशी ने 33.3 फीसदी, रामपुर में 38.1 फीसदी व संभल में 47 फीसदी मत प्राप्त कर जीत दर्ज की थी।

जबकि बिजनौर सीट पर रालोद प्रत्याशी ने 42.7 फीसदी मत हासिल कर जीत दर्ज की थी। अमरोहा में गठबंधन से रालोद प्रत्याशी 30.5 फीसदी मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे थे। वहां निर्दलीय प्रत्याशी हरीश नागपाल 32.5 फीसदी मत प्राप्त कर विजेता घोषित किए गए थे।

 

2009: रालोद-भाजपा गठबंधन को छह में से मिलीं सिर्फ दो सीटें 
वर्ष 2009 में रालोद ने सपा का साथ छोड़ भाजपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। इसमें मुरादाबाद की सियासी पिच पर पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन ने 39.6 फीसदी मत प्राप्त कर रालोद-भाजपा के गठबंधन का गणित बिगाड़ दिया था। गठबंधन की ओर से भाजपा प्रत्याशी को 33.1 फीसदी मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था।

सपा को 3.7, बसपा को 19.4 प्रतिशत मत हासिल हुए थे। रामपुर में भाजपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी को सिर्फ 10.1 फीसदी मत मिले थे। वहीं सपा को 38.1, कांग्रेस को 33 और बसपा को 15.7 फीसदी वोट मिले थे। बिजनौर में गठबंधन से रालोद प्रत्याशी ने सर्वाधिक 34.6 फीसदी वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

अमरोहा में गठबंधन से रालोद प्रत्याशी 40.1 फीसदी वोट पाकर जीते। वहीं संभल में गठबंधन से भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ 18.1 फीसदी वोट मिला था। यहां बसपा को सर्वाधिक 30.4 फीसदी, सपा को 28.4 तथा कांग्रेस को 18.9 फीसदी वोट मिले थे।

नगीना में गठबंधन से रालोद प्रत्याशी को सिर्फ 25.3 फीसदी मत मिले थे। वहां सपा को सर्वाधिक 36.5 फीसदी वोट मिला था। 

 

मोदी लहर में भाजपा ने छह सीटें जीतीं, लेकिन 50 फीसदी से कम मिले वोट
वर्ष 2014 कांग्रेस व रालोद ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा। लेकिन मोदी लहर में सभी छह सीटों पर गठबंधन उम्मीदवारों को बुरी तरह हार का समाना करना पड़ा था। मंडल की सभी छह लोकसभा सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था, लेकिन इस लहर में भी भाजपा प्रत्याशियों को 50 फीसदी से कम वोट मिले।

मुरादाबाद में गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी को 1.7, रामपुर में  16.4, संभल में 1.5 फीसदी, बिजनौर में गठबंधन से रालोद प्रत्याशी को 2.3, अमरोहा में 0.9 फीसदी वोट ही मिल सका था।
 
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2019 के लोकसभा चुनाव में मंडल की सीटों पर यह रहा परिणाम
लोकसभा क्षेत्र      पार्टी       कुल मत            विजयी प्रत्याशी 
मुरादाबाद          सपा        50.6 फीसदी       डॉ. एसटी हसन
रामपुर              सपा         52.7 फीसदी       आजम खां
संभल               सपा         55.9 फीसदी       डॉ.शफीकुर्रहमान बर्क 
बिजनौर            बसपा       51.0 प्रतिशत       मलूक नागर
अमरोहा           बसपा       51.4 प्रतिशत        कुंवर दानिश अली
नगीना              बसपा       56.3 प्रतिशत        गिरीश चंद्र
 
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