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शैली हत्याकांड: पुलिस की नाकामी... तीसरी जांच में भी नहीं खुला चार हत्याओं का राज, 10 साल पहले हुई थी वारदात

Sun, 13 Oct 2024 10:09 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद के बहुचर्चित डॉ. शैली हत्याकांड में पुलिस तीसरी बार भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। अब फिर से फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर रही है। 2014 में हुए चार लोगों की हत्या मामले में अपराधियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार की अपील पर तीन बार जांच हो चुकी है, लेकिन पुलिस इसे सुलझाने में असमर्थ रही है। 
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पीड़ित परिवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुरादाबाद के बहुचर्चित डॉ. शैली हत्याकांड की गुत्थी तीसरी बार हुई जांच में भी पुलिस नहीं सुलझा सकी। पुलिस की कमजोर तफ्तीश कहें या अपराधियों की मजबूत प्लानिंग, 10 साल पहले हुई चार लोगों की हत्या का अब तक खुलासा नहीं हो सका है। इस हत्याकांड को रंजिश में अंजाम दिया गया या फिर लूट की खातिर, ऐसे तमाम सवाल आज भी बरकरार हैं।

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अब तीसरी बार पुलिस ने केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी शुरू कर दी। सिविल लाइंस के जिगर कॉलोनी स्थित विद्या सदन में जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएम डॉ. शैली मेहरोत्रा, उनके पति डॉ. ओम मेहरोत्रा, ननद डॉ. रश्मि मेहरा और पांच साल की पोती दिव्यांशी उर्फ गिन्नी रहती थीं।

16 मई 2014 की दोपहर चारों के शव आवास में पड़े मिले थे। पोस्टमार्टम से पता चला था पोती गिन्नी की गला दबाकर हत्या की गई थी जबकि बाकी तीनों का गला रेतकर उन्हें मौत के घाट उतारा गया था। इस जघन्य हत्याकांड के समय डॉ. शैली के बेटे उज्ज्वल और बहू बंगलूरू में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे।
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घटना की जानकारी मिलने पर बेटे-बहू और रुद्रपुर (उत्तराखंड) में रहने वाली बेटी डॉ. गुंजन भी मुरादाबाद आ गई थीं। हत्यारे घर से सोने-चांदी के जेवर, नकदी और उनकी कार लूटकर ले गए थे। अगले दिन कार कांठ रोड पर हरथला चौकी के सामने खड़ी मिली थी।

पुलिस ने शुरुआत में तमाम संदिग्धों से पूछताछ की, लेकिन समय बीतने के साथ केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पुलिस ने एक साल की तफ्तीश के बाद केस बंद कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद बेटे और बेटी ने कोर्ट में एफआर को चुनौती दी और दोबारा जांच शुरू की गई। 

कुछ साल बीतने के बाद फिर से पुलिस ने एफआर लगा दी थी। इसके बाद परिवार हाईकोर्ट पहुंच गया और फिर से केस की जांच हुई, लेकिन फिर नतीजा नहीं मिला और पुलिस ने एफआर लगा दी। दस साल बाद तीसरी बार हुई जांच में भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। अब फिर से पुलिस ने एफआर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

बेटे-बहू को शहर में खुलवाना चाहते थे अस्पताल 

डॉ. शैली और उनके पति डाॅ. ओम अपने बेटे और बहू को शहर में अस्पताल खुलवाना चाहते थे। उन दिनों बेटे और बहू एमबीबीएस करने के बाद एमडी कर रहे थे। डॉक्टर दंपती यहां बेटे और बहू के लिए अस्पताल के लिए जमीन की तलाश कर रहे थे। बेटे का कहना है कि वह अपने मां-बाप का सपना पूरा करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें तो यह भी नहीं पता कि इस शहर में उनका दुश्मन काैन है।

एसटीएफ भी रही विफल, सर्जिकल चाकू से रेते गए थे गले 

पुलिस के नाकाम होने के बाद शासन के आदेश पर एसटीएफ को भी इस केस में लगाया गया था। एक माह तक टीम शहर में रही और केस पर काम किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके अलावा लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम शहर में आई थी। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

इसके अलावा शवों के पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से भी लंबी चर्चा की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी थी। जिसमें पता चला कि गला रेतने में जिस चाकू का इस्तेमाल किया गया था, वह चाकू ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। टीम ने इस हत्याकांड में किसी डॉक्टरी पेशे से जुड़े लोगों के शामिल होने का शक जताया था।

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केस काफी पुराना हो गया है। मैंने फाइल देखी है। इस केस पर अभी कुछ और बिंदुओं पर जांच होनी बाकी है। संबंधित विवेचक और टीम के साथ इस केस पर बात कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। - सतपाल अंतिल, एसएसपी
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