बेटे-बहू को शहर में खुलवाना चाहते थे अस्पताल
डॉ. शैली और उनके पति डाॅ. ओम अपने बेटे और बहू को शहर में अस्पताल खुलवाना चाहते थे। उन दिनों बेटे और बहू एमबीबीएस करने के बाद एमडी कर रहे थे। डॉक्टर दंपती यहां बेटे और बहू के लिए अस्पताल के लिए जमीन की तलाश कर रहे थे। बेटे का कहना है कि वह अपने मां-बाप का सपना पूरा करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें तो यह भी नहीं पता कि इस शहर में उनका दुश्मन काैन है।
एसटीएफ भी रही विफल, सर्जिकल चाकू से रेते गए थे गले
पुलिस के नाकाम होने के बाद शासन के आदेश पर एसटीएफ को भी इस केस में लगाया गया था। एक माह तक टीम शहर में रही और केस पर काम किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके अलावा लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम शहर में आई थी। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
इसके अलावा शवों के पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से भी लंबी चर्चा की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी थी। जिसमें पता चला कि गला रेतने में जिस चाकू का इस्तेमाल किया गया था, वह चाकू ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। टीम ने इस हत्याकांड में किसी डॉक्टरी पेशे से जुड़े लोगों के शामिल होने का शक जताया था।
केस काफी पुराना हो गया है। मैंने फाइल देखी है। इस केस पर अभी कुछ और बिंदुओं पर जांच होनी बाकी है। संबंधित विवेचक और टीम के साथ इस केस पर बात कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। - सतपाल अंतिल, एसएसपी