अपने हमराह सिपाही समेत चार लोगों की मौत का जिम्मेदार ट्रैफिक इंस्पेक्टर धर्मेंद्र राठौर बिना वेतन के ही ठाठ-बाट के साथ जिंदगी जी रहा था। मुरादाबाद में तीन साल की तैनाती के दौरान उसने वेतन नहीं लिया। इतना ही नहीं मुरादाबाद से पहले मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में भी तैनाती के दौरान उसने बिना वेतन के ही नौकरी कर ली। पिछले दस साल से भी अधिक समय से वह बिना वेतन के ही पुलिस विभाग के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत रहा है।
अवैध वसूली के आरोप में जेल भेजा गया धर्मेंद्र सिंह राठौर मूलरूप से फर्रुखाबाद जनपद के मोहम्मदाबाद थानाक्षेत्र के गोंधा का निवासी है। वह यूपी पुलिस में 2001 में सब इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुआ था। बीस साल की सर्विस में धर्मेंद्र की तैनाती उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में रही है।
पुलिस ने जांच पड़ताल की तो सामने आया कि धर्मेंद्र पिछले दस साल से बिना वेतन के पुलिस विभाग में नौकरी कर रहा था। जबकि उसके रहन-सहन और लग्जरी कारों में घूमने से लेकर होटलों तक जाने का स्टाइल अलग रहा है। बिना वेतन के ये सब कुछ करना इस बात की गवाही दे रहा है कि वह अवैध वसूली कर रहा था।
एसएसपी पवन कुमार ने बताया कि जांच में सामने आया कि धर्मेंद्र राठौर 2018 में मुजफ्फरनगर से ट्रांसफर होकर मुरादाबाद आया था। यहां उसके वेतन न मिलने का कारण मुजफ्फरनगर से एलपीसी (लास्ट पे सर्टिफिकेट) न आना है। मुजफ्फरनगर से एलपीसी नहीं भेजा गया है। जब मुजफ्फरनगर में इस मामले की जानकारी कराई गई तो पता चला कि धर्मेंद्र राठौर जब गाजियाबाद से ट्रांसफर होकर मुजफ्फरनगर आया था तो वहां से भी एलपीसी नहीं भेजा गया था।
इसी वजह से मुजफ्फरनगर में भी वेतन नहीं दिया गया था। गाजियाबाद में जब धर्मेंद्र राठौर के वेतन के बारे में जानकारी की गई तो वहां से पता चला कि वेतन संबंधी वहां कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। एसएसपी ने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी गाजियाबाद से मांगी गई है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि धर्मेंद्र को कब से और क्यों वेतन नहीं मिल रहा था।