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तत्कालीन थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज के खिलाफ केस दर्ज

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मुरादाबाद। सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत पर संज्ञान नहीं लेने के आरोप में सिविल लाइंस थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी सुधीर पाल धामा और अगवानपुर चौकी के तत्कालीन राघवेंद्र सिंह के खिलाफ मानवाधिकार आयोग के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। दोनों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में आईपीसी की धारा 166-ए के तहत रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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सिविल लाइंस थानाक्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने 18 नवंबर 2018 को सिविल लाइंस थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सुधीर पाल धामा और अगवानपुर पुलिस चौकी प्रभारी राघवेंद्र सिंह को सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में रिपोर्ट दर्ज करने को प्रार्थना पत्र दिया था। चौकी इंचार्ज और थाना प्रभारी ने महिला के प्रार्थना पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसके बाद पीड़िता ने न्यायालय की शरण लेते हुए केस दर्ज कराया था। इसके अलावा पीड़िता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज की शिकायत की थी। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए गए। वर्तमान में निरीक्षक सुधीर पाल धामा अलीगढ़ में और राघवेंद्र सिंह गाजियाबाद में तैनात हैं। आयोग के आदेश पर मानवाधिकार के नोडल अधिकारी एसपी (देहात) विद्या सागर मिश्रा ने वर्तमान चौकी इंचार्ज अगवानपुर राजेंद्र सिंह को दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कराने के निर्देश दिए। गुरुवार को सिविल लाइंस थाने में निरीक्षक सुधीर पाल धामा और उप निरीक्षक राघवेंद्र सिंह के खिलाफ (166ए ) पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई न करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। सीओ इंदु सिद्घार्थ ने बताया कि आयोग के आदेश पर केस दर्ज किया गया है।
न्यायालय के आदेश पर दर्ज केस पुलिस ने कर दिया था एक्सपंज
मुरादाबाद। पीड़ित महिला ने अगवानपुर पुलिस चौकी और सिविल लाइंस थाने में तहरीर देकर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था, मगर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था। इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट की शरण लेते हुए केस दर्ज कराया था। जिससे पुलिस ने एक्सपंज कर दिया था। इसके बाद पीड़िता ने मानवाधिका आयोग में इस मामले की शिकायत की थी।
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क्या है आईपीसी की धारा 166 ए
मुरादाबाद। कोई भी महिला दुष्कर्म, एसिड फेंकने व मानव व्यापार से संबंधित मामलों की सूचना वह स्वयं या किसी अन्य के माध्यम से पुलिस को देती है तो उस सूचना पर पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है कि वह तुरंत केस दर्ज कर जल्द से जल्द पीड़िता को इंसाफ दिलाए। पुलिस अधिकारी द्वारा केस दर्ज नहीं करने व आनकानी करने की स्थिति में पुलिस अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 166 ए के तहत मुकदमा दर्ज करना पुलिस अधिकारी की काननूनी बाध्यता है। जिसमें दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को दो साल तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है।
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