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अस्पताल में नर्स से हैवानियत: डॉक्टर को लेकर सामने आया चौंकाने वाला सच; महीने में चार दिन सर्जन करते थे ये काम

Sun, 25 Aug 2024 03:01 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

UP Crime News: स्वास्थ्य विभाग की जांच में शाहनवाज बीयूएमएस नहीं झोलाछाप निकला है। अस्पताल में सर्जन महीने में चार दिन आते थे। बाकी दिन अस्पताल झोलाछाप के सहारे चलता था। शाहनवाज के मामले के बाद आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्साधिकारी ने बीएएमएस व बीयूएमएस डॉक्टरों के क्लीनिक की जांच शुरू कर दी है।
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Rape in hospital Moradabad - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्वास्थ्य विभाग की जांच में ठाकुरद्वारा में नर्स से दुष्कर्म का मुख्य आरोपी शाहनवाज बीयूएमएस डॉक्टर नहीं, झोलाछाप निकला है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि हमारे यहां शाहनवाज का पंजीकरण नहीं है। उसकी डिग्री के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।
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इसकी रिपोर्ट बनाकर सीएमओ व डीएम को भेजी जा चुकी है। शाहनवाज एबीएम अस्पताल का संचालक होने के साथ वहां ओपीडी भी करता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह मरीजों को अंग्रेजी दवाएं लिखता था, जबकि सीएमओ कार्यालय में एबीएम अस्पताल में ओपीडी के लिए एमबीबीएस डॉ. हिमांशु चौधरी व सर्जन डॉ. सरताज आलम का पंजीकरण था।

इन्हीं के नाम पर शाहनवाज अस्पताल चला रहा था। क्षेत्र में जान पहचान का लाभ लेकर व लोगों से खुद को बीयूएमएस डॉक्टर बताकर उनका इलाज भी कर रहा था। अस्पताल में किसी स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ के दस्तावेजों का पंजीकरण न होने के बावजूद वहां डिलीवरी के केस आते थे।
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चर्चा है कि शाहनवाज ने अपनी पत्नी को भी बीयूएमएस डॉक्टर के रूप में लोगों से परिचित कराया था। डिलीवरी के केस उसकी पत्नी ही देखती थी। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमरदीप नायक ने कहा कि हमारे कार्यालय में शाहनवाज का पंजीकरण बीयूएमएस डॉक्टर के तौर पर नहीं है। उसे ओपीडी करने का अधिकार नहीं है।
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बीएएमएस व बीयूएमएस डॉक्टरों के क्लीनिक की जांच शुरू
शाहनवाज के मामले के बाद आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्साधिकारी ने बीएएमएस व बीयूएमएस डॉक्टरों के क्लीनिक की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी ने कहा कि जितने क्लीनिक व अस्पताल पंजीकृत हैं, सबकी जांच होगी। जो डॉक्टर एलोपैथिक की प्रैक्टिस कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए लिखेंगे। जो क्लीनिक पहले सील किए जा चुके हैं, उनकी सघनता से जांच होगी कि कहीं दोबारा तो नहीं खुल गए हैं।

दुष्कर्म के आरोपी के मकान और मदरसों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी
ठाकुरद्वारा में नर्स से दुष्कर्म के आरोपी एबीएम अस्पताल के संचालक शाहनवाज के पिता के तीनों मदरसों और मकान पर पुलिस प्रशासन ने बुलडोजर चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन की जांच में सामने आया है कि आरोपी का मकान और मदरसों का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर बना है। प्रशासन ने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है। मदरसों का पंजीकरण निरस्त करने की भी संस्तुति की गई है। शासन से हरी झंडी मिलते ही मकान और मदरसे को जमींदोज किया जाएगा।

 

दुष्कर्म का आरोपी शाहनवाज डिलारी के राजपुर केसरिया गांव का रहने वाला है। गांव में उसका मकान है, जबकि उसका पिता हकीम सगीर अहमद सकलैनी तीन मदरसों का संचालन एक ही भवन में कर रहा है। शुक्रवार को एसडीएम ठाकुरद्वारा, सीओ ठाकुरद्वारा और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की टीम ने गांव पहुंचकर जांच पड़ताल की थी।

जांच में सामने आया है कि मकान और मदरसे का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर है। पुलिस प्रशासन की टीम जल्द ही अब बुलडोजर से मकान और मदरसे को जमींदोज करेगी। डीएम अनुज सिंह ने बताया कि मदरसा सरकारी जमीन पर बना हुआ है। आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जाएगी।

महीने में चार दिन आते थे सर्जन, बाकी दिन झोलाछाप के सहारे
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा के एबीएम अस्पताल में जिन सर्जन के नाम पर सर्जरी के मरीज भर्ती किए जाते थे, वह सिर्फ महीने में चार दिन ही आते थे। यह बात खुद सर्जन डॉ. सरताज आलम ने स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि जुलाई में वह काशीपुर से मुरादाबाद रहने आ गए। यहां दूसरे अस्पताल में उन्होंने सर्जन के तौर पर नियुक्ति ले ली।

 

इसके बाद एबीएम अस्पताल में आना-जाना कम कर दिया। ऑन कॉल डॉक्टर के तौर पर सप्ताह में एक दिन ही जाते थे। ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि बाकी दिन डिलीवरी व सर्जरी कौन करता था। मरीज झोलाछाप के हवाले रहते थे।

स्वास्थ्य विभाग हर बिंदु पर पड़ताल कर रहा है। 17 अगस्त की रात अस्पताल में नर्स को बंधक बनाकर दुष्कर्म की घटना की बाद 18 अगस्त को जब पुलिस व स्वास्थ्य विभाग का छापा अस्पताल पर पड़ा तो डॉ. सरताज एबीएम अस्पताल में ऑपरेशन कर रहे थे।

 

उन्होंने बताया कि डिलीवरी का गंभीर केस था। महिला डॉक्टर अस्पताल में नहीं थीं, उन्होंने ही सर्जरी की और जज्जा-बच्चा को बचाया। इसके बाद पुलिस शाहनवाज को ले गई। स्टाफ में अफरातफरी मची तो वह भी घबराकर वहां से चले गए। ऑपरेशन के बाद मरीज को उन्होंने यूं ही छोड़ दिया। सर्जरी की फाइल पर हस्ताक्षर भी नहीं किए। यह बात डॉ. सरताज ने अपने बयान में दर्ज कराई है।


 

अब एनेस्थेटिस्ट से होगी पूछताछ
सर्जन डॉ. सरताज ने सीएमओ को दिए बयान में बताया है कि जिन मरीजों की सर्जरी हुई है। उन्हें डॉ. अरुण जैन ने एनेस्थीसिया (निष्चेतना इंजेक्शन) दिया था। वहीं पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम के आने से पहले सर्जरी के कई मरीजों को वहां से शिफ्ट करने के मामले में भी पूछताछ चल रही है। इस मामले में शाहनवाज के अलावा सर्जन डॉ. सरताज को भी शक के दायरे में रखा गया है। उनकी भूमिका जांच टीम को संदिग्ध लग रही है।


 

डॉ. सरताज पर लटकी कार्रवाई की तलवार
सर्जरी के मरीजों को बिना देखरेख छोड़ने के मामले में सर्जन डॉ. सरताज पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इसे अपराध की श्रेणी में मेडिकल नेग्लीजेंसी का मामला मानते हुए विभाग कार्रवाई कर सकता है। वहीं चर्चा है कि मेडिकल काउंसिल से डॉ. सरताज का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश भी की जा सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर विभागीय अधिकारियों ने इस मामले में बयान नहीं दिया है। एनेस्थेटिक डॉक्टर के बयान दर्ज होने के बाद सर्जन के बयानों से मिलाया जाएगा।

 
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एबीएम अस्पताल के दोनों डॉक्टरों के अलावा एनेस्थेटिक के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। इस मामले की रिपोर्ट हमें प्रशासन को सौंपनी है। जांच पूरी करने में दो दिन और लगेंगे। इसके बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी।- डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ



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