रामपुर रियासत के आखिरी नवाब रजा अली खां की पांच अचल संपत्तियों में शामिल शाहबाद की कोठी (लखी बाग) के मूल्यांकन से संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। बिल्डिंग, जमीन और खेती से होने वाली आमदनी सहित इस कोठी की कीमत सात अरब, 21 करोड़, 39 लाख, 13 हजार, 594 रुपये आंकी गई है। अब नवाब की अचल संपत्ति में शामिल कोठी खासबाग की जमीन की मूल्यांकन की रिपोर्ट शेष रह गई है।
रामपुर के आखिरी नवाब रजा अली खां की संपत्ति का बंटवारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक शरीयत कानून के हिसाब से उनके वारिसों के बीच किया जाना है। बंटवारे की प्रक्रिया जिला जज की अदालत की देखरेख में चल रही है। कोर्ट ने नवाब की चल और अचल संपत्तियों का मूल्य निर्धारित करने का आदेश दिया था।
नवाब की चल संपत्ति की कीमत निर्धारित कर इसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है। अब अचल संपत्ति का मूल्यांकन किया जा रहा है। 17 अक्तूबर को नवाब की तीन अचल संपत्तियों कोठी बेनजीर, कुंडा और नवाब के रेलवे स्टेशन के मूल्यांकन की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी गई थी।
इन तीनों संपत्तियों की कीमत 4.32 अरब निर्धारित की गई थी। बुधवार को इस मामले में नवाब की शाहबाद स्थित कोठी लखीबाग के मूल्यांकन की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई। लखीबाग का कुल क्षेत्रफल लगभग 230 एकड़ है। जमीन, बिल्डिंग, वृक्षों की कीमत और जमीन पर की जाने वाली खेती से होने वाली आमदनी सहित लखीबाग की कुल कीमत सात अरब, 21 करोड़, 39 लाख, 13 हजार 594 रुपये आंकी गई है।
अब नवाब की अचल संपत्ति में शामिल कोठी खासबाग की रिपोर्ट शेष रह गई है। इसकी जमीन के मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।
नवाब की अचल संपत्ति में शामिल कोठी शाहबाद (लखी बाग) के मूल्यांकन की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी गई है। कोठी शाहबाद का कुल क्षेत्रफल लगभग 230 एकड़ है। जमीन की कीमत का निर्धारण सर्किल रेट के आधार पर किया गया है। जल्द ही कोठी खासबाग की मूल्यांकन आख्या भी न्यायालय में पेश कर दी जाएगी।
-अरुण प्रकाश सक्सेना, एडवोकेट कमिश्नर
एक लाख पेड़ों की वजह से नाम पड़ा था लखीबाग
रामपुर नवाब की कोठी शाहबाद में एक लाख से अधिक पेड़ लगाए थे। इस वजह से इसका नाम लखीबाग पड़ा था। रामपुर रियासत के पहले नवाब फैजुल्ला खां अपनी सेना के साथ यहीं पर ठहरे थे। 145 साल पहले नवाब कल्बे अली खां के दौर में यहां आलीशान कोठी की तामीर कर बाग लगाया गया।
कुल एक लाख पौधे लगाए गए थे। हालांकि अब पेड़ों की संख्या कम रह गई है। यहां पर आम की पचास से अधिक प्रजातियों के पेड़ लगे थे, जिसमें लंगड़ा, फजरी, तोतापरी, सुरखा, समरवई, चौसा, रोशन तबाक, सफेदा, डिटोल, लखनब्बा, लैली, टपका आदि प्रमुख प्रजातियां हैं।
तीन गांवों में है फैला है लखीबाग
लखीबाग का कुल रकबा 230 एकड़ है, जो शाहबाद के भीतरगांव, मंगोली और शाहबाद खास तक फैला हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि लखीबाग में एक सुरंग भी है जो रामपुर आकर निकलती है। हालांकि इस सुरंग के बारे में लोगों को अब अधिक जानकारी नहीं है। इस कोठी में नवाब की सेना का डेरा होता था। नवाब के परिवार के लोग भी समय-समय पर यहां रहते थे।