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सिस्टम पर सवाल: सरकारी अभिलेखों में तालाब, मौके पर बरातघर, पानी टंकी

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कुंदरकी (समीउद्दीन नीलू)। बिलारी तहसील की कुंदरकी नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित तालाब की भूमि पर कहीं नगर निगम का खुद का बरातघर बना है तो कहीं पानी की टंकी बनी है। कहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ के आवास बने हैं तो कहीं नाला। कई माह पहले तत्कालीन एसडीएम द्वारा कराई गई जांच में भी यह तथ्य उजागर हो चुका है। खास बात यह है कि तालाब की भूमि की देखरेख का जिम्मा संभाले नगर पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी भी सब कुछ जानने के बाद चुप्पी साधे बैठे हैं। क्षेत्र के लोगों ने तालाबों से अवैध अतिक्रमण हटाने के साथ ही जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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बिलारी तहसील की कुंदरकी नगर पंचायत क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि करीब चार दशक पहले कस्बे में विभिन्न स्थानों पर तालाब हुआ करते थे। कहीं सिंघाड़े की खेती होती थी तो कहीं कमलगट्टा पैदा होता था। बदलते समय के साथ सब कुछ बदल गया है।
कुंदरकी कस्बे के अधिकांश तालाब पानी के अभाव में या तो सूख चुके हैं या फिर गंदगी आदि से पट चुके हैं। ढाई दशक पहले नगर पंचायत की पानी की टंकी का निर्माण भी तालाब की भूमि पर हुआ है। बरातघर का निर्माण भी वर्ष 2015 में तालाब की भूमि पर कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आवासीय परिसर और नाले का निर्माण भी चार-पांच साल पहले तालाब की भूमि पर करा दिया गया। एक शिकायत के आधार तत्कालीन एसडीएम अनुराज जैन द्वारा तहसील प्रशासन व नगर पंचायत की संयुक्त टीम से कराए गए सर्वे और पैमाइश के बाद तालाबों की जमीन पर उक्त निर्माण कार्य होने की पुष्टि भी हुई। इस पर उन्होंने तहसीलदार बिलारी तथा ईओ नगर पंचायत कुंदरकी को तालाबों पर पाए गए अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी छह सितंबर 2021 को दिए। हालांकि आज तक इन अवैध कब्जों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
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मेरे मोहल्ले के निकट काफी बड़ा तालाब था। उसमें सिंघाड़े पैदा होते थे, मछलियां पलती थी। अब कई लोगों ने भी अवैध कब्जा कर तालाब की भूमि पर कच्चे-पक्के मकान बना लिए हैं।
रामबिहारी, मोहल्ला नुरुल्ला
मेरे घर के सामने बहुत बड़ा तालाब था। अतिक्रमण के चलते अब इसका आकार सिकुड़ कर कम हो गया है। उसमें घास उग आई है। तमाम लोग धीरे-धीरे उसे पाट रहे हैं।
मुकेश, मोहल्ला नुरुल्ला
जहां नगर पंचायत की पानी की टंकी लगी है वहां करीब तीस साल पहले गड्ढा हुआ करता था। उसके किनारे मछली की बाजार लगती थी। यह सब जगह तालाब की बताई जाती थी। अब यहां बरातघर, पानी टंकी बनी हुई है।
निजामुद्दीन, मोहल्ला बाजार
मैं बचपन से क्षेत्र को देख रहा था। जहां पानी की टंकी व बरातघर बना है वहां पहले गड्ढा था और उसमें पानी था। नगर पंचायत ने जब निर्माण कराया, तो उस समय किसी ने विरोध नहीं किया। क्योंकि एक तो नगर पंचायत का मामला था दूसरे लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं थी कि यह भूमि तालाब की है।
नौशाद कुरैशी, मोहल्ला बाजार
अधिकारियों के आदेश पर मैंने नगर पंचायत के ईओ व अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में पैमाइश की थी, जिसमें नगर पंचायत का बरातघर, पानी टंकी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का आवासीय परिसर तालाब की भूमि में बना पाया गया था। 89 अन्य लोगों द्वारा भी तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा कर कच्चे-पक्के आवास बनाए गए मिले थे। मैंने पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी थी।
शिवकुमार, क्षेत्रीय लेखपाल
तहसील की टीम जब पानी टंकी और बरात घर की पैमाइश करने गई, तो मैं वहां नहीं था। अन्य सभी स्थानों पर था। 89 अन्य लोगों द्वारा भी तालाब की भूमि पर कब्जे की पुष्टि हुई है, जिन्हें एक माह पूर्व नोटिस जारी कर 15 दिन में उत्तर मांगा गया था। जवाब नहीं आया है। फिर नोटिस जारी की जा रही है।
त्रिवेंद्र, ईओ नगर पंचायत, कुंदरकी
पानी टंकी का निर्माण ढाई दशक पहले किया गया था। उसी की चहारदीवारी थी, जिसमें बरातघर बनाया गया है। मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है कि तालाब की भूमि पर नगर पंचायत क्षेत्र में कहीं कोई निर्माण हुआ है।
जीनत मेहंदी, चेयरमैन, नगर पंचायत कुंदरकी
तालाब भूमि पर जहां भी सरकारी अथवा गैर सरकारी निर्माण हुआ है वह गलत है। हाईकोर्ट इसकी मानीटरिंग कर रहा है। उसमें किसी भी तरह की कार्रवाई दबने नहीं दी जाएगी। जो लोग भी इसके लिए जिम्मेदार रहे हैं उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी, जो क्षति होगी उसकी वसूली भी दोषी लोगों से की जाएगी।
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आंजनेय कुमार सिंह, मंडलायुक्त
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