प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के नेतृत्व में चल रही है। लेकिन गंगा की सबसे बड़ी सहयोगी नदी रामगंगा की अनदेखी उमा भारती के मंत्रालय से जुड़ा केंद्रीय जल आयोग ही कर रहा है। रामगंगा के जल की वाटर क्वालिटी नापने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की सैटेलाइट मानीटरिंग मशीन रामगंगा के बजाए कीचड़ में पड़ी हुई है। ऐसे में यह कैसे जल प्रदूषण की सूचना दे रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
केंद्रीय जल आयोग ने 2012 सेे देशभर में 700 स्थानों पर गंगा की सहयोगी नदियों में नाव के आकार की मानीटरिंग मशीन डाल रखी हैं। इन मशीनों से नदियों की वाटर क्वालिटी रोजाना सैटेलाइट से आयोग की प्रयोगशाला में बैठे वैज्ञानिक लेते रहते हैं। मशीन की देखरेख करने के लिए एक्सिस नेनो टेक्नोलॉजी नाम की दिल्ली की एक कंपनी को ठेका दे रखा है। कंपनी ने एक सुरक्षा गार्ड मशीन की देखरेख को लगाया है। मशीन रामगंगा के जल में पड़ी होनी चाहिए।
लेकिन मशीन रामगंगा के कीचड़ में पड़ी हुई है। ऐसे में जल की क्या क्वालिटी दे पा रही होगी। गंगा नदी में मिलने वाली रामगंगा बड़ी सहयोगी नदी है। फिर भी रामगंगा के प्रदूषण पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा। मौजूदा समय में रामगंगा में प्राकृतिक धार तो उद्गम स्थल गैरसैण से आ नहीं रही, जलधारा को कालागढ़ बांध पर रोके रखा गया है, नालों का गंदा पानी इसमें जरूर बह रहा है। रोजाना सैटेलाइट से रिपोर्ट लेने के बाद भी जल संसाधन मंत्री उमा भारती चुप हैं। इससे लग रहा है कि विभाग उन्हें गुमराह तो नहीं कर रहा।