मुरादाबाद। गोवर्धनमठ पुरी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि धर्म के मार्ग में राजनीति का हस्तेक्षप हो रहा है। धर्म से अतिरिक्त राजनीति विस्फोटक है। जो राजनीति नहीं उन्माद है। राजनीति की सीमा से बाहर की राजनीति अभिशाप है।
वह बुधवार को रेलवे स्टेडियम में आयोजित धर्मसभा में शामिल होने के बाद सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान की चेयरपर्सन शिक्षा गुप्ता के आवास पर चरण पादुका पूजन कार्यक्रम में बोल रहे थे। श्रद्धालुओं के बीच से उठे एक सवाल के जवाब में उन्होंने धर्म और राजनीति को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग में राजनीति का हस्तक्षेप हो रहा है। धर्म से अतिरिक्त राजनीति है तो वह विस्फोटक है। उसका नाम राजनीति नहीं उन्माद है। राजनीति की सीमा के बाहर जो राजनीति है, वह अभिशाप है। राजधर्म का नाम ही राजनीति है। नीति और धर्म पर्यायवाचक हैं। महाभारत में राजनीति, राजधर्म, शास्त्र धर्म, अर्थनीति, दंड नीति को पर्यायवाची के रूप में प्रयोग किया गया है।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि धर्म का अनुवाद रिलिजन हो ही नहीं सकता है। अंग्रेजी में कोई ऐसा शब्द नहीं है, जो ठीक ढंग से धर्म का अनुवाद रूप दे सके। धर्म के दो वेद हैं। तप करने के लिए सुख का त्याग करना पड़ेगा।
उन्होंने सलाह दी कि मशीनों का उपयोग कम करें। इससे रोजगार कम होता है। परेशानी ज्यादा बढ़ती है।
इस दौरान अजय गुप्ता, आशा गुप्ता, राघव गुप्ता, दीप्ति गुप्ता, गुंजन गुप्ता, अनीता गुप्ता, वाईपी गुप्ता, डॉ. नीता मोहन, डॉ. मनोज अग्रवाल, डॉ. राकेश कुमार, मनोहर लाल, डॉ. आईएस सचदेवा, महेश अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, मुकुल शास्त्री आदि मौजूद रहे।
अपने अधिकार की सीमा में मंत्रों का उपयोग करें
मुरादाबाद। गोवर्धनमठ पुरी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने गायत्री मंत्र के सवाल पर कहा कि गायत्री मंत्र का जप कोई भी कर सकता है। गायत्री एक छंद भी है। आचार्य जब दीक्षा देते हैं, तब व्यक्ति गायत्री मंत्र जप करने के लिए अधिकृत होता है। मंत्रों में अद्भुत शक्ति है, जिस मंत्र की ऊर्जा पचाने में जो समर्थ नहीं है, उसे मंत्र का जप तारक नहीं होकर मारक हो जाता है। अपने अधिकार की सीमा में मंत्र का उपयोग करना चाहिए। ब्यूरो
मंत्रोच्चारण के बीच हुआ चरण पादुका पूजन
मुरादाबाद। श्रद्धालुओं से भरे परिसर में मंत्रोच्चारण के बीच चरण पादुका का पूजन किया गया। इस दौरान वातावरण भक्ति मय हो गया। इसके बाद हरे राम, हरे राम के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने चरण पादुका के दर्शन किए।