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लापरवाही से वाहन चलाने वाले चालकों के लिए नजीर बनेगी पुलिस की कार्रवाई

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पाकबड़ा। पाकबड़ा पुलिस की ये कार्रवाई उन वाहन चालकों के लिए नजीर बनेगी, जो लापरवाही से वाहन चलाकर दूसरे लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार होते हैं। रविवार को पाकबड़ा क्षेत्र में कैलरा रोड पर कैंटर की चपेट में आकर दंपती और मासूम पोती की मौत के लिए जिम्मेदार चालक के खिलाफ गैरइरादतन हत्या में केस दर्ज किया गया है। वरना हादसों के मामलों में वाहन चालक को अक्सर खड़े-खड़े जमानत मिल जाती थी। पुलिस ने सख्त कार्रवाई कर दिखा दिया है लापरवाही से वाहन चलाने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे। कैंटर चालक तीन दिन से जेल में है।
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मझोला थानाक्षेत्र के ज्ञानपुर गांव निवासी सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल पवन चौधरी अपनी पत्नी सुशीला देवी और पोती अनवी को बाइक से लेकर अमरोहा जा रहे थे। पाकबड़ा में कैलसा रोड पर इनकी बाइक में कैंटर ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में पति-पत्नी और छह वर्षीय पोती की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में पवन चौधरी के बेटे गौतम चौधरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गौतम चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में कैंटर चालक जुबैर पुत्र जुम्मा खां पर आरोप लगाया की उसने तेजी और लापरवाही से गलत दिशा से आकर बाइक में टक्कर मार दी थी। इससे उसके पिता, मां और बेटी की मौत हो गई थी।
पुलिस इस मामले में कैँटर चालक जुबैर, निवासी ग्राम मढै़या कलां पायती कला थाना डिडौली जनपद अमरोहा के खिलाफ धारा 279, 304, 427 आईपीसी में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी जुबैर को सोमवार को कोर्ट में पेश किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता की ओर से मामले को हादसा बताकर जमानत की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से इंकार कर दिया। इसके बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया था।
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मजबूत चार्जशीट के लिए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करेगी पुलिस
मुरादाबाद। केस में धाराओं को देखते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी नामंजूर कर दी थी, अब पुलिस केस को और मजबूत करने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करेगी। बताया जा रहा है कि जुबैर के परिजन लगातार इस मामलों को हादसा बता कर धाराओं को बदलने की मांग कर हैं, लेकिन पुलिस ने ऐसा करने से इंकार कर दिया है। थाना प्रभारी रंजन शर्मा ने बताया की मामले की जांच की रही है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। टेक्निकल टीम से दोनों वाहनों का परीक्षण कराएगी।
गैर इरादतन हत्या में आजीवन कारावास तकी सजा का प्रावधान
अधिवक्ता मोहम्मद याकूब के मुताबिक, धारा 304 आईपीसी गैर इरादतन हत्या अर्थात ऐसा कोई कार्य जो मृत्यु का कारण हो और जिसे मृत्यु देने के इरादे से किया गया हो। वह इस धारा के अंतर्गत आता है। जिसमें अधिकतम आजीवन कारावास या दस साल की कैद और साथ ही आर्थिक दंड भी देने का प्रावधान इस अपराध में किया गया है।
धारा 304 ए में मात्र दो वर्ष की सजा
जान बूझकर दुर्घटना न करना अर्थात दुर्घटना में किसी की मृत्यु हो जाना जो जानबूझकर नहीं की गई है। यह मानव वध की श्रेणी में नहीं आता है। इसमें अधिकतम दो वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
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