मुरादाबाद। ग्राम पंचायत बरवारा मझरा में विकास कार्यों के नाम पर प्रशासकों द्वारा अनियमित ढंग से की गई लाखों रुपये की धन निकासी के मामले में उप निदेशक पंचायती राज की जांच रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर ने अनियमितता में संलिप्त मिले प्रशासकों के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट देने का आदेश 13 सितंबर को डीएम को दिया था। लेकिन, डीएम और सीडीओ से डीपीआरओ कार्यालय पहुंचने के बाद यह आदेश करीब बीस दिन से ठंडे बस्ते में है।
डीपीआरओ ने उप निदेशक की जांच में अनियमितता में संलिप्त मिले तत्कालीन एडीओ व सचिव को जो नोटिस जारी किया, उसका जवाब भी करीब एक सप्ताह पहले दाखिल कर दिया गया। लेकिन, डीपीआरओ स्तर से अभी तक इसमें आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कमिश्नर के आदेश पर अब तक कार्रवाई न होने से तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
25 दिसंबर 2020 से 27 मई 2021 तक ग्राम पंचायत की बागडोर एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (सचिव) के हाथों में रहीं। इस दौरान जिले में प्रशासकों ने करीब 38 करोड़ रुपये विकास कार्य के नाम पर खर्च दिखाए थे। अमर उजाला ने जब इसकी पड़ताल की तो तमाम गड़बड़ियां सामने आईं। इसी कड़ी में कमिश्नर के आदेश पर उप निदेशक पंचायती राज ने ग्राम पंचायत बरवारा मझरा में प्रशासकों के कार्यकाल की जांच की तो उसमें कई खामियां उन्हें मिलीं।
किसी कार्य का कोटेशन उपलब्ध नहीं कराया गया तो किसी कार्य को वित्तीय स्वीकृति लेने से बचने के लिए शासन के आदेश के विपरीत टुकड़ों में दिखा दिया गया। अभिलेखीय परीक्षण में यह भी पाया गया कि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मनोज कुमार द्वारा 4 लाख 73 हजार 540 रुपये की धनराशि का भुगतान करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति एडीओ पंचायत मुरादाबाद आमोद कुमार शर्मा से ली गई है, जिसके लिए वह अधिकृत नहीं है।
एक लाख रुपये से अधिक की सामग्री क्रय करने के लिए कम से कम तीन टेंडर प्रक्रिया अपनानी चाहिए, जो जांच में नहीं मिलीं। कमिश्नर ने कार्रवाई के लिए डीएम को भेजे आदेश में यह भी कहा था कि उप निदेशक को ग्राम पंचायत सचिव ने इस आशय का कोई अभिलेख भी मांगने पर उपलब्ध नहीं कराया। पांच लाख रुपये से अधिक के कार्य के लिए डीएम से अनुमति लेने से बचने के लिए उसे टुकड़ों में दिखाने की भी बात कही गई थी।
वाटर कूलरों की खरीद में कुछ इसी तरह की गड़बड़ियां मिलीं थीं। उप निदेशक की इस जांच रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने 13 सितंबर को डीएम को पत्र लिख कर अनियमितता में संलिप्त मिले प्रशासकों (एडीओ पंचायत व पंचायत सचिव) के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कृत कार्रवाई से अवगत कराने के आदेश दिए थे। कार्रवाई डीपीआरओ स्तर से होनी थी, लिहाजा कमिश्नर कार्यालय से चला यह आदेश डीएम व सीडीओ कार्यालय से होता हुआ तीन दिन बाद ही डीपीआरओ कार्यालय पहुंच गया। लेकिन, इसके बाद से वह आदेश ठंडे बस्ते में चला गया। कमिश्नर के आदेश का पालन 20 दिन बाद भी नहीं हो सका है।
बरबारा मझरा जांच मामले में संबंधित एडीओ व पंचायत सचिव को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया था। स्पष्टीकरण प्राप्त हो गया है। उसका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण में जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। -आलोक प्रियदर्शी, डीपीआरओ
डीडी को जांच के दौैरान सभी मांगे गए अभिलेख दिखाए थे। इसके अलावा डीडी के कार्यालय में भी वह अभिलेख उपलब्ध कराए थे। उसकी रिसीविंग भी है। लिहाजा यह कहना गलत है कि मैंने किसी तरह का कोई अभिलेख उन्हें उपलब्ध नहीं कराया। कमिश्नर की जांच के आदेश के क्रम में डीपीआरओ द्वारा दी गई इस आशय की नोटिस के जवाब में मैंने इन तथ्यों का उल्लेख किया है तथा सभी मांगे गए अभिलेख भी उपलब्ध कराए हैं। -मनोज कुमार सिंह, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव बरवारा मझरा