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न कटी पर्ची, न बंटी दवा, इलाज को भटके मरीज

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जिला अस्पताल में हड़ताल होने पर ओपीडी बंद पड़ा। - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के 110 कर्मचारियों को निकाले जाने के विरोध में स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर रहे। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में ओपीडी सेवा ठप रही। अस्पताल में डाक्टर तो मौजूद रहे लेकिन मरीजों को इलाज नहीं मिला। न तो पर्ची कटी और न ही दवा बंटी। दूरदराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश लौटना पड़ा। जरूरतमंद मरीजों ने इमरजेंसी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराया।
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डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोएिसशन के बैनर तले जिला और महिला अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों ने मुरादाबाद कर्मचारी समन्वय समिति के हड़ताल का समर्थन किया। शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल में न तो पर्ची काउंटर खुला और न ही दवा काउंटर। इंजेक्शन कक्ष भी बंद रहा। सिर्फ इमरजेंसी और पोस्टमार्टम सेवा ही बहाल रही। कामकाज ठप कर स्वास्थ्य कर्मी ओपीडी के बाहर जुट गए। जहां एमडीए वीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद सभी आंबेडकर पार्क धरने में चले गए। वहीं दूरदराज से जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों को इलाज के लिए इधर उधर भटकना पड़ा। एक कमरे से दूसरे कमरे का चक्कर लगाते रहे। ओपीडी में मौजूद डाक्टरों ने बिना पर्ची मरीजों को नहीं देखा। इसके बाद मायूस मरीज घर लौट गए। वहीं जरूरतमंद मरीजों ने इमरजेंसी सेवा का सहारा लिया या फिर प्राइवेट अस्पतालों का रुख किया।
आंखों की नहीं बदली पट्टी
मुरादाबाद। हनुमान मूर्ति क्षेत्र के देहरी गांव से बहू कुसुम के साथ जिला अस्पताल पहुंची बुजुर्ग रामवती देवी ने गुरुवार को आंखों का आपरेशन कराया था। शुक्रवार को उनकी पट्टी बदलनी थी। रामवती ने बताया कि किसी तरह जिला अस्पताल पहुंची थी, आधा घंटे इधर-उधर चक्कर लगाया, लेकिन पट्टी नहीं बदली जा सकी। मायूस लौटना पड़ा।
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बिजनौर से बेटी के कानों की जांच पहुंचे याकूब
मुरादाबाद। मोहम्मद याकूब शुक्रवार को बिजनौर से जिला अस्पताल पहुंचे। उन्हें अपनी बेटी फौजिया खानम की कानों की जांच करानी थी। याकूब ने बताया कि डाक्टर तो मिले, लेकिन पर्ची नहीं बनने से उन्होंने देखा नहीं। करीब एक घंटे तक अस्पताल में रहा। थक हारकर लौटना पड़ा।
दवा के लिए भटकती रहीं शशि
मुरादाबाद। लालबाग निवासी शशि शर्मा को नींद नहीं आती है। दिल दिमाग बेचैन रहता है। उनका जिला अस्पताल से इलाज चलता है। उन्होंने बताया कि दवा खत्म हो गई है। दवा लेने अस्पताल आई थी। लेकिन दवा काउंटर बंद है। बिना पर्ची डाक्टर देखने को तैयार नहीं हैं। अब शनिवार को आना पड़ेगा।
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