मंडल में हाईस्पीड ट्रेन के ट्रायल से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लेकिन इसके ट्रायल का मतलब ये नहीं कि मंडल में हाई स्पीड चलना शुरू हो जाएगी। इन ट्रेनों का संचालन उन रूट पर होगा जिन पर चलाने के लिए बजट में घोषणा की गई है। मुरादाबाद मंडल को ट्रायल के लिए चुना गया है तो इसका कारण कुछ और ही है।
मुरादाबाद मंडल में ट्रैक में कर्व (घुमाव) सबसे ज्यादा हैं। जिसके चलते हाई स्पीड ट्रेन की परीक्षा अपने यहां होगी। 27 अप्रैल को मंडल मुख्यालय जर्मनी की टेल्गो कंपनी की बनाई गई हाईस्पीड ट्रेन मुरादाबाद मंडल में ट्रायल के लिए भेजी जा रही है। ट्रेन का ट्रायल जून में कराया जाएगा। तब तक ट्रेन के ट्रायल से पूर्व आवश्यक जरूरतों को पूरा किया जाएगा।
जिससे ट्रायल में कोई परेशानी न आए। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन केवल ट्रायल के लिए आ रही है। इसका संचालन मुरादाबाद में नहीं होगा। ट्रेन बजट में घोषित रूटों पर ही चलाई जाएगी। उनकी माने तो मुरादाबाद मंडल को ट्रायल के लिए चुने जाने का कारण कुछ और ही है। जबकि मंडल में अधिकतम रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा ही है। बताया जा रहा है मुरादाबाद मंडल से होकर गुजर रहे ट्रैक में घुमाव अन्य रूट की तुलना में ज्यादा है और यह दिल्ली के नजदीक भी है।
गाजियाबाद से चलने के बाद हापुड़ से मुरादाबाद के बीच रूट पर कई कर्व हैं जबकि मुरादाबाद से बरेली के बीच भी रूट घुमावदार है। वहीं मुरादाबाद से सहारनपुर के बीच भी रूट में जमकर कर्व है। घुमावदार रूट पर विदेश में बनी ट्रेन की परीक्षा ली जाएगी। क्योंकि कंपनी केवल सीधे रूट पर हाई स्पीड का ट्रायल करती है। उसे भारतीय रूट पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना बाकी है।