मुरादाबाद। जिले की दो नई ग्राम पंचायतों हटहट और शाहआलमपुर के प्रधानों का अधिकार सीज करने की चेतावनी का नोटिस डीएम ने जारी किया है। प्रधानों पर आरोप है कि शासन के सख्त निर्देश के बावजूद उन्होंने अपनी ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय तथा पंचायत भवन का निर्माण कार्य नहीं कराया है। जबकि यह कार्य 31 जनवरी 2022 तक पूर्ण हो जाना चाहिए था। खास बात यह है कि इन दोनों निर्माण कार्यों करीब 18 लाख रुपये से अधिक धनराशि खर्च होगी, लेकिन ग्राम पंचायत के खातों में अब तक इसकी आधे से भी कम धनराशि आई है। यही वजह है कि नोटिस मिलने के बाद से दोनों ग्राम पंचायतों में हड़कंप है।
पंचायत चुनाव से पूर्व परिसीमन के दौरान ग्राम पंचायत हटहट और शाहआलमपुर नई ग्राम पंचायत बनीं हैं। हटहट में अफसाना तैय्यब तथा शाहआलमपुर में सुनीता देवी प्रधान निर्वाचित हुईं हैं। शासन के निर्देश के मुताबिक दोनों ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन व सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया जाना है। प्रधानों को इसका निर्माण 31 जनवरी 2022 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन दोनों ही ग्राम पंचायतों में निर्माण का कार्य अधूरा है।
डीएम ने दोनों प्रधानों को इसके लिए हाल ही में अधिकार सीज करने की चेतावनी का नोटिस जारी किया है। जिसमें उन पर पंचायत भवन व सामुदायिक शौचालयों का निर्माण अधिकारियों के आदेश के बाद भी पूर्ण न कराने की बात कही गई है। दोनों प्रधानों ने बताया कि पंचायत भवन व सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए 18.25 लाख रुपये लागत आएगी। हटहट प्रधान का कहना है कि उनकी ग्राम पंचायत के खाते अब तक कुल 7270759 रुपये आए हैं। इसमें से 257013 रुपये अन्य निर्माण कार्य में खर्च हो चुके हैं। ऐसे में खाते में जो धनराशि बची है उससे दोनों का निर्माण कराया जाना भी संभव नहीं है। सिर्फ सामुदायिक शौचालय निर्माण पर ही करीब 5.13 लाख रुपये की लागत आएगी। प्रधान ने बताया कि जब खाते में निर्माण के योग्य धनराशि ही नहीं है तो वह निर्माण कहां से करा देतीं। शौचालय का निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। पंचायत भवन की भी नींव भर गई है। आगे धनराशि आने पर काम आगे बढ़ाया जाएगा। डीएम की नोटिस का जवाब दिया जा रहा है।
शाहआलमपुर की प्रधान सुनीता ने बताया कि उनके खाते में अब तक करीब छह लाख रुपये हैं। इतनी कम धनराशि से कार्य नहीं कराए जा सकते। डीएम का नोटिस मिलने के बाद कुछ निजी स्तर से तो कुछ उधार आदि की व्यवस्था करके निर्माण कार्य में लगा रहे हैं। इससे सामुदायिक शौचालय तो बन जाएगा, लेकिन पंचायत भवन का निर्माण नींव तक ही रोकना पड़ेगा। शासन से जब और धनराशि आएगी तब कार्य हो सकेंगे।