फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Moradabad News: जिला अस्पताल में नहीं मनोचिकित्सक.....5292 लोगों को कम आ रही नींद

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक न होने के कारण 5292 मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। इनमें से अधिकांश नींद कम आने की समस्या से जूझ रहे हैं। यह मरीज अब तक मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव शेखर से परामर्श ले रहे थे। छह फरवरी से डॉक्टर की संविदा समाप्त होने के बाद मानसिक रोग की ओपीडी बंद पड़ी है, जिससे मरीजों को न परामर्श मिल पा रहा है और न ही सही इलाज।
विज्ञापन


वहीं राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दो साल से डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। मार्च 2026 में जिला अस्पताल और उससे जुड़े केंद्रों पर 373 मरीज ओपीडी में पहुंचे। इनमें 88 नए और 285 फॉलोअप केस शामिल हैं। मरीजों में सबसे ज्यादा चिंता डिप्रेशन को लेकर है। जनवरी में 92 मरीज अवसाद से पीड़ित मिले, जबकि सालभर में यह संख्या 686 तक पहुंच गई। इसके अलावा एंजाइटी और पैनिक डिसऑर्डर के 159 और सोमैटाइजेशन के 196 मामले सामने आए। गंभीर मानसिक बीमारियों में बाइपोलर डिसऑर्डर के 226 और स्किजोफ्रेनिया के 84 मरीज दर्ज किए गए।
चौंकाने वाली बात यह है कि 1227 मरीजों को काउंसिलिंग की जरूरत पड़ी, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते उन्हें समुचित परामर्श नहीं मिल पा रहा। बच्चों और किशोरों में भी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनके 230 मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 12 मरीजों में आत्महत्या के विचार या व्यवहार भी मिले, जो स्थिति की गंभीरता को और बढ़ाता है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जहां इलाज महंगा है। विशेषज्ञों की कमी और बढ़ते मरीजों के बीच मुरादाबाद का मानसिक स्वास्थ्य ढांचा खुद बीमार नजर आ रहा है। 5292 मरीजों में से 2399 मरीज विभिन्न मानसिक समस्याओं से और 2893 मरीज सिर्फ सीजनल डिप्रेशन से पीडि़त थे।
विज्ञापन





परामर्श के साथ दवाओं का भी टोटा झेल रहे मरीज



जिला अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पिछले दो साल से डॉक्टर नहीं हैं। एनएचएम के तहत तैनात डॉ. अभिनव शेखर का अनुबंध खत्म हो चुका है। अब मरीजों के सामने नया संकट है कि कोई दवा बदलवानी हो तो किससे लिखवाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में अवसाद के मामले बढ़ते हैं। लोगों में मेनिया यानी उग्रता के लक्षण आते हैं। ऐसे में उनकी दवा बदलनी पड़ती है। मरीजों को जिला अस्पताल में सीमित दवाएं ही मिल पा रही हैं। मंगलवार को भी अवसाद और सिर दर्द की परेशानी लेकर आई महिला मरीजों को दर्द की दवा आइब्रुफेन पकड़ा दी गई। मानसिक रोग की दवा बाहर से लेने के लिए कहा गया।



वर्जन



मानसिक रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिखा गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैनात डॉक्टर और टीम सीएमओ के अधीन है। यह टीम जिला अस्पताल में तीन दिन सेवाएं देती हैं। मरीजों की काउंसिलिंग करती है और दवाएं देती है।
विज्ञापन




- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें