मुरादाबाद। यूनिसेफ की रिपोर्ट सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर रही है। समय से पहले जन्मे नवजातों को ऑक्सीजन की कमी से बचाने के लिए मां को कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा दी जाती है। मुरादाबाद में इस दवा की जरूरत वाली गर्भवतियों में से सिर्फ 43 प्रतिशत को ही यह दवा दी गई। संभल में आंकड़ा और चिंताजनक है। यहां सिर्फ 38 प्रतिशत महिलाओं को डिलीवरी से पहले यह दवा दी गई।
जबकि रामपुर, अमरोहा और बिजनौर की स्थिति काफी बेहतर है, जो मंडल मुख्यालय की स्वास्थ्य सेवाओं को आईना दिखा रही है। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो रामपुर 79 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है, जबकि अमरोहा 78 और बिजनौर 65 प्रतिशत पर हैं। मुरादाबाद 43 प्रतिशत पर अटका हुआ है और संभल मात्र 38 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे खड़ा है। यानी जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं तक जीवनरक्षक दवा पहुंचाने में गंभीर असमानता साफ दिख रही है।
असली झटका तब लगता है, जब स्वास्थ्य केंद्रों का डेटा सामने आता है। टॉप-10 सूची में कुछ केंद्र 90 से 100 प्रतिशत तक प्रदर्शन दिखा रहे हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ बॉटम-10 सूची में कई केंद्रों की हालत शून्य तक पहुंच गई है। पीएचसी मिलक (राजपुरा) और पीएचसी रतुपुरा में एक भी महिला को यह दवा नहीं दी गई।
पीएचसी ताजपुर, भनैड़ा और धामपुर जैसे केंद्र भी 15 प्रतिशत के आसपास सिमटे हुए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे प्रदेश का औसत महज 23 प्रतिशत है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुमार के मुताबिक प्रसव से पहले गाइनेकोलॉलिस्ट अल्ट्रासाउंड से यह पता लगाते हैं कि बच्चे का वजन और गर्भ का समय कितना है।
इसके आधार पर महिला को कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इंजेक्शन दिया जाता है। प्री-टर्म डिलीवरी में बच्चे के फेफड़े कमजोर होने का खतरा रहता है, जिससे उसे डिलीवरी के समय सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। बच्चे का शरीर नीला पड़ सकता है। उसे बर्थ हाईपॉक्सिया तक हो सकता है। यह इंजेक्शन बच्चे के फेफड़ों की क्षमता को बढ़ा देता है।
जिलेवार स्थिति प्रतिशत में
रामपुर – 79%
अमरोहा – 78%
बिजनौर – 65%
मुरादाबाद – 43%
संभल – 38%
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टॉप प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य केंद्र
पीएचसी धनारी – 100%
यूपीएचसी नजीबाबाद – 93%
पीएचसी बदाखास – 93%
पीएचसी चमरौआ, नूरपुर, सीएचसी जोया, सैदनगली – 90%
जॉइंट हॉस्पिटल बछराऊं – 88%
सीएचसी शाहबाद, पीएचसी चंदोक – 87%
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सबसे खराब प्रदर्शन (बॉटम-10)
पीएचसी मिलक (राजपुरा) – 0%
पीएचसी रतुपुरा – 0%
पीएचसी ताजपुर – 13%
पीएचसी भनैड़ा – 14%
एससी ठाकुरद्वारा – 18%
सीएचसी संभल – 24%
सीएचसी डिलारी – 25%
वर्जन
प्रदेश स्तर के आंकड़ों से तुलना करें तो हमारे जिलों की स्थिति बेहतर है। हालांकि जिन महिलाओं को इस दवा की जरूरत है, उन सभी को यह मिलनी चाहिए। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
- डॉ. आशु अग्रवाल, एडी हेल्थ