रामपुर। समाजवादी पार्टी के स्वार विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी व सपा सांसद आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम की सियासी राह में रामपुर का नवाब परिवार रोड़ा बनकर आगे आ गया है। वहीं, अन्य विपक्षी दलों ने भी कुछ इस तरह से घेराबंदी की है, ताकि वोटों का बिखराव हो और अब्दुल्ला आजम को चुनाव हरा दिया जाए। हालांकि, अब्दुल्ला आजम भी तेवर तल्ख किए हुए हैं और वे जेल से आने के बाद से ही सरकार व सियासी विरोधियों पर लगातार हमलावर हैं। यह सीट इसलिए भी खास है, क्योंकि पहली बार भाजपा ने यह सीट अपने सहयोगी दल अपना दल एस को दी है, जिससे नवाब परिवार के हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां चुनाव मैदान में उतरे हैं।
स्वार टांडा विधानसभा क्षेत्र से अधिकांश बार कांग्रेस पार्टी का राज रहा है। 1951 से लेकर 1962 तक कांग्रेस के महमूद अली खां चुनाव जीते। 1967 मकसूद हसन स्वतंत्र पार्टी से जीतकर विधानसभा पहुंचे, तो 1969 में भारतीय जनसंघ के टिकट पर जीतकर राजेन्द्र शर्मा पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1974 व 1977 में कांग्रेस इस सीट पर फिर काबिज हो गई और सैय्यद मुर्तजा अली खां व मकबूल अहमद ने चुनाव जीता। किन्तु, 1980 में यह सीट भाजपा के कब्जे में आ गई और चौधरी बलवीर सिंह विधानसभा पहुंच गए। इसके बाद 1985 का चुनाव कांग्रेस जीत गई, जबकि इसके बाद 1989 से लेकर 1996 तक भाजपा काबिज रही। लगातार चार बार जीतकर शिवबहादुर सक्सेना विधायक बनते रहे। 2002 में भाजपा से यह सीट छिन गई और नवाब परिवार के नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत गए। 2007 का चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी से लड़ा और जीत भी गए, लेकिन सूबे में बसपा की सरकार बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और बसपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2012 का चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और 2017 में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता सांसद आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम खां से चुनाव में हार मिली। अब्दुल्ला आजम खां काफी मतों से जीतकर विधानसभा पहुंचे और वे सबसे कम उम्र के विधायक बने। लेकिन, बाद में अब्दुल्ला आजम जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और कई विवादित मामलों में फंस गए, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर मार्च 2019 में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उनका निर्वाचन शून्य कर दिया गया। चुनाव आयोग ने भी सीट को रिक्त घोषित कर दिया। हालांकि, यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
अब फिर इस सीट पर सपा के टिकट पर अब्दुल्ला आजम और अपना दल एस के टिकट पर हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा कांग्रेस के टिकट पर रामरक्षपाल सिंह उर्फ राजा ठाकुर, आम आदमी पार्टी से आसिफ मियां मुख्य उम्मीदवार हैं। बसपा से स्वार से अध्यापक शंकर लाल को चुनाव मैदान में उतारा है। ऐसे में मुख्य मुकाबला सपा और अपना दल एस के बीच ही लग रहा है। लेकिन, कांग्रेस के रामरक्षपाल सिंह और आम आदमी पार्टी के आसिफ मियां सपा की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। स्वार के मोहम्मद सलीम अंसारी की मानें तो विकास के नाम पर वोट देना है। जाति, संप्रदाय उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। मजदूर, युवाओं और किसानों के हित में काम करने वाले को ही वोट दिया जाएगा। बूढ़ी दढ़ियाल के आशक अली की नजर में भी विकास ही मुख्य मुद्दा रहेगा। क्षेत्र में ऐसे विधायक की दरकार है, जो गांवों में मूलभूत सुविधाएं देने का काम करे। सड़कें, पुलिया, अस्पताल जिसके एजेंडे में शामिल हों। ग्राम पर्वतपुर के अमर सिंह सैनी का कहना है कि राष्ट्रवाद, विकास और बेरोजगारी के मुद्दे पर मतदान करेंगे। बीते कुछ सालों में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। वहीं, ग्राम नारायणपुर के योगेश कुमार चौहान कहते हैं कि क्षेत्र के विकास और सुशासन के मुद्दे पर मतदान किया जाएगा। बीते सालों में काफी सुधार हुआ है, लेकिन किसानों की तरफ भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
लए फायदेमंद होगा।