हरिद्वार से मिलता है ऑर्डर
इरशाद ने बताया कि वह करूला मीना बाजार में ही अपने परिवार के साथ कांवड़ तैयार करते हैं। गुरहट्टी चौराहे पर उनकी दुकान है। सावन माह में इसी दुकान से कांवड़ बेचते हैं। सावन माह शुरू होने से पहले ही शिवभक्त उन्हें फोन पर ऑर्डर देना शुरू कर देते हैं। हर साल एक हजार से अधिक कांवड़ बेचते हैं।
60 साल से कांवड़ बना रहा परिवार
मो. इरशाद ने बताया कि उनका परिवार 60 साल से कांवड़ बना रहा है। उनके दादा अब्दुल गफूर अहमद ने कांवड़ बनाना शुरू किया था। दादा ने ताऊ बाबू को कांवड़ बनाने की बारीकियां सिखाईं। दादा के इंतकाल के बाद ताऊ ने उनकी परंपरा को आगे बढ़ाया।
ताऊ ने मेरे पिता निसार अहमद को कांवड़ बनाने का हुनर दिया। पिता निसार अहमद से मुझे विरासत में ये कला मिली। अब मेरा बेटा अरशान अहमद, बहन निशात अंजुम, पत्नी चांद परवीन मिलकर कांवड़ बना रहे हैं।
बाबू भाई कांवड़ वाले के नाम से थी ताऊ की पहचान
मो. इरशाद ने बताया कि मेरे ताऊ की पहचान बाबू भाई कांवड़ वाले के नाम से थी। 2012 में ताऊ का निधन हो गया था। उसके पांच साल बाद पिता निसार अहमद भी नहीं रहे है। तब से इरशाद अपने परिवार के साथ कांवड़ बना रहे हैं।