मुरादाबाद। शहर के इमामबारगाहों में मजलिसों में जिक्र-ए-इमाम हुसैन का सिलसिला जारी है। शनिवार को हुई मजलिस में हजरत इमाम हुसैन के बचपन के साथी हबीब इब्ने की शहादत पर अजादार रो पड़े। अजादारों ने मातम और सीनाजनी की।
चाैथी मुहर्रम पर शनिवार सुबह नाै बजे मोहल्ला लाकड़ीवालान में मरहूम अली यावर नकवी के घर पर मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में माैलाना सैयद नकी अब्बास रिजवी ने कहा कि इमाम हुसैन को जिस तरह के साथी मिले, ऐसे साथी किसी को नहीं मिले। इमाम हुसैन ने खत लिखकर अपने बचपन के साथी हबीब इब्ने मजाहिर को कर्बला बुलाया। उनको जैसे ही इमाम का खत मिला वह फाैरन कर्बला की तरफ रवाना हो गए और कर्बला पहुंचकर अपनी जान इमाम हुसैन पर कुर्बान कर दी। जिसे सुनकर अजादार रो पड़े। या हुसैन की सदाएं बुलद करने लगे। मजलिस के बाद अजादारों ने मातम किया। आसिफ आब्दी ने नौहा पढ़ा। मजलिस में शबी हैदर ने मर्शिया ख्वानी की।
इस दाैरान नसीम हैदर, जावेद यावर, शान हैदर, सुहैल अहमद रिजवी, आसिम यावर, कायम हसनैन, अमीरुल हसन जाफरी, डॉ. तनवीर, मोहम्मद अब्बास, आलम आब्दी, आसिफ रजा, जाफर अब्बास, डब्बू नकवी, सुल्तान हैदर आदि माैजूद रहे।
वहीं दूसरी मजलिस चौमुखा पुल इमामबाड़े में शाम 5:30 बजे हुई। जिसे मौलाना कौसर मुजतबा ने खिताब किया। तीसरी मजलिस इमामबाड़ा हकीम फरजंद अली में हुई। इसे मौलाना हसन मुजताबा ने खिताब किया।