जिला अस्पताल में हर दिन बेशक संसाधन और सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं लेकिन स्टाफ की उदासीनता पुराने ढर्रे पर है। यहां वार्ड बॉय से लेकर डॉक्टर तक ने संवेदनहीनता दिखाई और मरीज दर्द से कराहता रहा। बात शुक्रवार सुबह 10 बजे की है। डबल फाटक के भदौड़ा निवासी वृद्ध शकुंतला अपने बेटे राहुल (22) का इलाज कराने आई थीं।
बुजुर्ग शकुंतला अपने बेटे को लेकर किसी तरह इमरजेंसी में पहुंची। वहां कुछ अन्य मरीज भी थे। यह बात दोपहर 12:10 बजे की है। एक घंटे तक इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर ने मरीज राहुल को देखा तक नहीं। एक घंटे बाद वार्ड बॉय ने देखा को परेशानी पूछी। ऑपरेटर ने पर्चा बनाया और डॉक्टर के मरीज को देखे बिना ही पहली मंजिल पर वार्ड में भर्ती करा दिया गया।
कुछ देर बाद एक स्वास्थ्य कर्मी वहां पहुंचा और राहुल की परेशानी पूछी। सारी बता बताने पर उसने महिला से एक मरहम लाने के लिए कहा। यह मरहम अस्पताल में नहीं था तो वृद्ध को बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ा। उसके पास दवा के लिए रुपये नहीं थे, इसलिए सरकारी अस्पताल पहुंची थीं लेकिन यहां भी निराश ही मिली।
स्ट्रेचर पर हर समय वार्ड बॉय की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बावजूद यह लापरवाही हुई है तो मैं इस पूरे प्रकरण की जांच कराऊंगा। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल