महिला अस्पताल के पास भी नहीं है फायर एनओसी
महिला अस्पताल के पास भी फायर सेफ्टी की एनओसी नहीं है। जबकि यहां हर दिन 15 से ज्यादा नवजात व महिलाएं भर्ती रहती हैं। एसएनसीयू में भी 10 से अधिक नवजात हमेशा भर्ती रहते हैं। कई प्राइवेट अस्पतालों से भी यहां बच्चों को भेजा जाता है।
इसके बावजूद अस्पताल में अग्नि सुरक्षा को लेकर इंतजाम काफी नहीं हैं। एसएनसीयू के बाहर लगे अग्निशमन यंत्रों की एक्सपायरी डेट निकल चुकी है। पाइपलाइन लगी हैं लेकिन आग लगने पर पानी की सप्लाई व आग बुझाने का इंतजाम नहीं है।
अग्निशमन यंत्र चालू स्थिति में क्यों नहीं थे, इसकी जानकारी की जाएगी। फिलहाल हमारे स्टाफ ने पहुंचकर सबसे पहले आग बुझाने का काम किया। बाकी मामलों पर अस्पताल प्रबंधन से चर्चा करेंगे। जहां कमियां हैं, उन्हें बता दी जाएंगी। - कृष्ण कांत ओझा, चीफ फायर सेफ्टी ऑफिसर
जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग
बृहस्पतिवार को सुबह के 10 बजे थे। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में बने सीटी स्कैन कक्ष में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. निर्मल ओझा रोजाना की तरह मरीज का सीटी स्कैन करने बैठे थे। मशीन शुरू हुई ही थी कि अचानक बराबर वाले बैटरी रूम में तेज धमाका हुआ।
वहीं रखीं 34 बैटरियां एक-एक फट गईं। कुछ ही पलों में पूरे ट्रॉमा सेंटर में आग की लपटें और धुआं छा गया। ट्रॉमा सेंटर में भगदड़ मच गई। नर्सेज ड्यूटी रूम से स्टाफ दौड़कर आए, उन्होंने रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ओझा को बाहर निकाला। इसके बाद सभी महिला स्टाफ बाहर भेजी गईं।